फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘रहे आबाद तेरा आस्तां मखदूमे रब्बानी’

Mon, 14 Mar 2016 12:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,बांदा
विज्ञापन
मुशायरे में शेर पढ़ते शायर गुफरान रब्बानी। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
बांदा। तरही मुशायरे की महफिल में शायरों ने हजरत मखदूमे रब्बानी को खिराजे अकीदत (श्रद्धांजलि) की झड़ी लगा दी। स्थानीय के अलावा कई शायर बाहर के भी थे। ‘रहे आबाद तेरा आस्तां मखदूमे रब्बानी’ मिसरह तरह पर आधी रात के बाद तक मुशायरा चला।
विज्ञापन


डॉ. खालिद इजहार ने शेर पढ़ा- ‘हो जिस गुलशन का तुमसा पासबां मखदूमे रब्बानी, तो उसमें आएगी कैस खिजा मखदूमे रब्बानी’। मास्टर फखरे आलम ने शेर कहा- ‘करम तेरा है बहरे बेकरां मखदूमे रब्बानी, बहुत छोटी हमारी झोलियां हैं मखदूमे रब्बानी’। युवा शायर नजरे आलम (नजर) ने पढ़ा- ‘सुब्हानल्लाह-सुब्हानल्लाहा तुम्हारा जिक्र करते हैं, फलक पर चांद, सूरज, कहकशां मखदूमे रब्बानी’।

सैय्यद आरिफ मसूदी ने शेर सुनाया- ‘जहे किस्मत मुझे तकदीर उस दरबार में लाई, मुकद्दर जगमगाते हैं जहां मखदूमे रब्बानी’। मास्टर नवाब अहमद (असर) का शेर था- ‘हुआ जो सामना बे-दीनों मुलहिद से किसी भी दिन, बने शमशीरे हक की तुम जबां मखदूमे रब्बानी’। महोबा के शायर अख्तर ने कहा- ‘कई सूरज विलायत के छुपे हैं तेरे सीने मेें, है जैसे आसमां पे कहकशां मखदूमे रब्बानी’। जालौन से आए शायर दिलकश ने शेर पढ़ा- ‘उन्हीं के घर से निस्बत है तेरे सारे घराने को, जो पहुंचे एक पल में ला-मकां मखदूमे रब्बानी’।
विज्ञापन


मुशायरे में गुफरान रब्बानी, सैय्यद रहबर रब्बानी, आफाक महोबवी, यासिर मसूदी, हकीम बशीर तालिब, अनवर हमीरपुरी, सईद वारसी, निश्तर बांदवी, सरवर रब्बानी, खादिम, शरीफ, वाकिफ, गौहर आदि शायरों ने भी शेर सुनाए। निजामत (संचालन) इलाहाबाद के शायर जीशान रब्बानी ने की।

सदारत (अध्यक्षता) मुशायरे के मेजबान सैय्यद खुशतर रब्बानी ने की। जिला पंचायत पूर्व अध्यक्ष शकील अली, हाजी गुलाम मुस्तफा, खानकाह इंटर कालेज प्रबंधक हाजी मोहम्मद फारूक, बाबा फरीद भारतीय, वार्ड सदस्य सगीर अहमद आदि शामिल रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
MORE
AU ऐप में पढ़ें