बांदा। तवे की तरह तप रही बुंदेलखंड की धरती में भारी भरकम क्षमता और भंडारण वाले बांध भी सूख गए हैं। पानी की जगह पत्थर और चट्टानें नजर आ रही हैं। खेत और पेट को सालभर पानी उपलब्ध कराने वाले गंगऊ, बरियारपुर और रनगवां बांध ‘डेड स्टोर’ हो गए हैं। चित्रकूटधाम मंडल के 15 बांधों में मात्र मौदहा बांध में पानी है। सिंचाई विभाग ने बांधों से पानी देने में हाथ खड़े करते हुए कहा है कि अब मानसूनी बारिश से ही हालात बदल सकते हैं।
15 जून से मानसूनी मौसम शुरू हो जाता है, लेकिन फिलहाल बुंदेलखंड में जल्द बारिश के आसार नहीं हैं। सीमावर्ती मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना में स्थित गंगऊ, बरियारपुर व रनगवां बांध/वियर में पानी तलहटी में सिमट गया है। अब इनसे पानी नहीं लिया जा सकता। ये बांध केन नदी पर बने हैं। मंडल की कई हजार बीघा जमीन की सिंचाई इन्हीं बांधों से निकली नहरों से होती है। इस वर्ष हालात ज्यादा खराब हैं। बीते साल मानसून में पर्याप्त बारिश न होने से रनगवां, गंगऊ और बरियारपुर बांध अपनी पूरी क्षमता से नहीं भर पाए थे।
बांधों को भरने का एक मात्र जरिया मानसूनी बारिश ही है। उसी का इंतजार किया जा रहा है।-वेद प्रकाश गोंड़, अवर अभियंत सिंचाई विभाग