बांदा। कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान, लखनऊ के निदेशक अजीत कुमार ने कहा कि बुंदेलखंड के किसानों को दलहन और तिलहन के साथ साथ मोटे अनाज की उपज को भी बढ़ाना होगा, क्योंकि आजकल के खाने के स्वाद और पहले के खाने के स्वाद में बहुत ही अंतर आया है। अब परिवार में एक ही तरह के स्वाद की थाली होती है, जबकि पहले परिवार में चार तरह के पौष्टिक आहार वाली अलग-अलग थालियां होती थीं।
कहा कि युवा, महिला और गर्भवती महिलाओं के अलावा बच्चों को अलग-अलग तरह का पौष्टिक आहार दिया जाता था। अब तेल व मसालेदार खाना खाने से दो से तीन साल के बच्चों की आंखों में चश्मा ही नहीं बल्कि हार्ट अटैक व किडनी से संबंधित गंभीर बीमारियां हो रही हैं। ऐसे में मोटा अनाज पौष्टिकता से भरपूर और उसे ही बढ़ावा देना बेहतर रहेगा।
कहा कि आगे आने वाले समय के लिए नए विषयों को जोड़ना आवश्यक है। वैज्ञानिकों को पर्यावरण परिवर्तन को ध्यान में रखकर तकनीकी विकसित करनी चाहिए। बुंदेलखंड व उत्तर प्रदेश की जैव विविधिता पर अध्ययन कर इसे संजोने का कार्य करना होगा।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरेंद्र प्रताप सिंह ने विश्वविद्यालय में चल रही विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। कहा कि विश्वविद्यालय मे एक इको पार्क, तुलसी उद्यान, वनस्पति उद्यान, प्राकृतिक खेती के साथ साथ कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं चल रही हैं।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा. एसके सिंह डा वीके गुप्ता, आयुक्त चित्रकूटधाम मंडल बालकृष्ण त्रिपाठी, डीआईजी अजय कुमार सिंह, जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल, एसपी अंकुर अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
29जेएनडी29: डीएसपी को ज्ञापन देते हुए भगवान परशुराम सेना के सदस्य। संवाद