बांदा। नगर पालिका ने बारिश के तीन महीनों में फॉगिंग के नाम पर करीब साढ़े सात लाख रुपये धुएं के नाम पर उड़ा दिए। इसमें मैलाथियान की खपत सिर्फ 12 लीटर हुई है, जबकि पांच लीटर डीजल में एक लीटर मैलाथियान मिलाने का मानक है।
नालियों में 90 हजार रुपये की एंटी लार्वा दवाएं भी छिड़कने का दावा किया जा रहा है, जबकि हकीकत यह है कि शहर के ज्यादातर वार्डों में मशीनें फॉगिंग के लिए पहुंची ही नहीं। शहरवासियों का मच्छरों ने जीना दुश्वार कर रखा है।
नगर पालिका क्षेत्र में करीब दो लाख की आबादी है और यह 31 वार्डों में विभाजित है। शहरवासियों को गंदगी से मुक्ति दिलाने व उन्हें मच्छरों जनित बीमारी से बचाने में पालिका की अहम भूमिका होती है। मलेरिया विभाग के समन्वय से पालिका शहर में फॉगिंग का कार्य कराती है।
बारिश के मौसम में मच्छरों का प्रकोप बढ़ता है और इसी दौरान डेंगू, मलेरिया, मौसमी बुखार जैसी बीमारियां पनपती हैं।
नगर पालिका का दावा है कि संचारी रोग नियंत्रण अभियान के दौरान तीन माह तक शहर में फॉगिंग कराई गई है। नगर पालिका में फॉगिंग के लिए तीन वाहन हैं, जिनमें एक वाहन साल भर से मरम्मत के लिए पड़ा है।
दो वाहनों से शहर के 31 वार्डों में फॉगिंग कराई जाती है। अधिकारियों के मुताबिक जुलाई, अगस्त व सितंबर में शहर के ज्यादातर वार्डों में मैलाथियान के साथ फॉगिंग कराई गई है। इसमें प्रति माह ढाई लाख रुपये का डीजल खर्च किया गया है।
वहीं मलेरिया विभाग से तीन माह के अंतराल में करीब 12 लीटर मैलाथियान लिया गया है। इसके अलावा नालियों की सफाई के बाद एंटीलार्वा दवा का छिड़काव कराया गया। इसमें करीब हर माह तीस हजार रुपये खर्च हुए। वहीं शहरवासियों का कहना है कि अधिकारियों के बंगले और कुछ खास लोगों के मोहल्लों को छोड़कर कहीं फॉगिंग का कार्य नहीं हुआ, जबकि पालिका से कई बार इसकी मांग की गई।
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