बांदा। पुलिस लाइन में बैरक के हाल की छत गिर जाने से मंगलवार को सिपाही की मौत हो गई। इसके बाद भी प्रशासन पुराने और जर्जर भवनों को लेकर बेपरवाह बना है। शहर सरकारी कार्यालयों के भवन जर्जर ही नहीं कंडम हो गए है। आलम यह है कि 112 साल पुराने भवन में स्कूल कार्यालय, 87 साल पुराने भवन में अस्पताल, बिजली विभाग, बाल विकास विभाग के कार्यालय चल रहे हैं। ऐसे में कर्मचारी हर समय जोखिम जान डालकर काम कर रहे है। कई बार भवन का मलवा उनके ऊपर गिर चुका है और जख्मी हो गए। बुधवार को भवनों की पड़ताल की गई तो डराने वाली तस्वीर सामने आई।
87 साल पुराने भवन में चल रही मेडिकल केयर यूनिट
1936 में बने भवन में मेडिकल केयर यूनिट चल रहा है। पहले यहां सीएमओ कार्यालय था। पांच साल पहले सीएमओ कार्यालय नए भवन में स्थानांतरित हो गया। इसमें मेडिकल केयर यूनिट संचालित कर दिया गया। 87 साल पुराने भवन की हालत ऐसी है कि वह कभी भी गिर सकता है। भवन में पानी टपकने के अलावा स्लेप व दीवारों का प्लास्टर, ईंटे निकलने लगी है। दीवारों ने दरारें छोड़ दी है।
बारिश में टपकता है एक्सईन (शहर) कार्यालय
जिला पंचायत के 33 साल पुराने भवन में अधिशासी अभियंता विद्युत (शहर) का कार्यालय चल रहा है। भवन की हालत बेहद जर्जर है। दीवारों ने दो इंच की दरारें छोड़ दी है। स्लेप की आधी-आधी ईंटे गिर गई है। भवन का कोई ऐसा हिस्सा नहीं है जो बारिश के दौरान टपकता न हों। भवन में एक्सईएन समेत 12 से अधिक नियमित व संविदा कर्मचारी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं।
श्रम उपायुक्त कार्यालय भी जर्जर
शहर के केवटरा मोहल्ले में निजी भवन में उपायुक्त श्रम व गांधी ग्रामोद्योग व कटरा में आईजी व डीआईजी स्टांप का कार्यालय है। भवन काफी पुराना और जर्जर है। हालांकि विभागीय अधिकारियों ने भवन की अंदरूनी मरम्मत करा दी है, लेकिन दीवारों में सीलन और जगह-जगह प्लास्टर फूला हुआ है। बारिश में पानी टपकता है। यहां पर भी 24 से अधिक कर्मचारी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं।
112 साल पुराना है जीआईसी स्कूल भवन
शहर के डीएम काॅलोनी रोड में स्थित 112 साल पुराने भवन में जीआईसी के प्रधानाचार्य और शिक्षक बैठते है। हालांकि पिछले दिनों भवन की आधी इमारत गिर जाने से बच्चों की कक्षाएं अब नए कक्षों में चलाई जा रही है, लेकिन स्टाफ कार्यालय, कंप्यूटर लैब आदि कार्य पुराने भवन में ही हो रहे है। प्रधानाचार्य का कहना है कि कई बार भवन निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन धनराशि स्वीकृत नहीं हो रही है।
वर्जन...
पुराने व जर्जर भवनों से सरकारी कार्यालय हटाए जाएंगे। एक्सईएन कार्यालय कमिश्नरी में स्थानांतरित किया जा रहा है। यह एक-दो दिन में हो जाएगा। -उमाकांत त्रिपाठी, एडीएम, बांदा।