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Banda News: तपिश से सूखने लगीं नदियां झेलना होगा पानी का संकट

Wed, 19 Apr 2023 01:24 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
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बांदा। पानी संकट का जिक्र हो और बुंदेलखंड का नाम न लिया जाए, ऐसा हो नहीं सकता। खासकर गर्मी के दिनों में शहर से लेकर गांव तक पानी संकट का हल्ला रहता है। हर साल की तरह इस बार भी पानी संकट के आसार हैं। गर्मी का पारा चढ़ते ही नदियों का जल स्तर भी घटने लगा है। केन नदी तेजी से सिकुड़ रही है। नदी के दोनों किनारों से लगभग 12 मीटर पानी कम होने का अंदेशा जताया गया है। यही हाल रहा तो मई से ही पानी संकट का दंश लोगों को झेलना पड़ सकता है।
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बुंदेलखंड केन समेत यमुना, बेतवा, बागै, मंदाकिनी, चंद्रावल आदि नदियों से जाना जाता है। शहर और ग्रामीण क्षेत्र के बड़े हिस्से को इन नदियों के जरिए पानी मुहैया कराया जाता है। बानगी के तौर पर बांदा शहर को केन नदी के जरिए लगभग 19 एमएलडी (मिलियन लीटर डेली) पानी की आपूर्ति जल संस्थान के माध्यम से की जाती है। यह आपूर्ति तभी तक संभव है जब तक नदी में पानी का भंडार अच्छा रहता है। केन नदी के दोनों किनारों पर स्थित भूरागढ़ इंटकवेल और कर्बला इंटकवेल के कुओं में पर्याप्त पानी होता है, लेकिन भीषण गर्मी में केन नदी सिकुडने के साथ इंटकवेल के कुओं में पानी का भंडार भी कम हो जाता है। जलापूर्ति की क्षमता 19 एमएलडी से घटकर करीब 17.2 एमएलडी हो जाती है। ऐसे में पानी का संकट होना तय रहता है।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक गर्मी बढ़ने के साथ नदियों का पानी कम होना शुरू हो गया है। केन नदी करीब 12 मीटर, यमुना नदी लगभग 10 मीटर और बागै नदी करीब सात मीटर सिकुड़ गई है। अगले मई माह में पानी और नीचे जाने के आसार हैं। हालांकि जल संस्थान का दावा है कि अभी जलापूर्ति पर प्रभाव नहीं पड़ा है। मई में पानी संकट का खतरा मंडरा रहा है। फिर भी इससे निपटने की तैयारी पूरी है।
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बांदा। चित्रकूटधाम मंडल जल संस्थान की ओर से वित्तीय वर्ष 2022-23 में करीब 12 करोड़ 76 लाख रुपये जल मूल्य के रूप में वसूला गया। दावा है कि पिछले वित्तीय वर्ष से करीब 8 फीसदी जलकर वसूली ज्यादा हुई। जबकि पाइप लाइन लीकेज दुरुस्त करने समेत अन्य मरम्मतीकरण के कार्य में विभाग ने पूरे साल में लगभग 9 करोड़ 30 लाख रुपये खर्च किए हैं। महाप्रबंधक (जल संस्थान) का कहना है कि शेष राशि गर्मी के मद्देनजर अनुरक्षण कार्य में खर्च की जाएगी। यह भी कहा कि अगले पांच माह में राजस्व वसूली बेहद कम होती है। गर्मी में जलापूर्ति दुरुस्त रखने के लिए उपकरणों आदि की खरीद कर ली गई है।



1. सबमर्सिबल मोटर पंप (विभिन्न क्षमता के) खरीदे गए हैं।
2. लीकेज रोकने के लिए विभिन्न साइज के डी-ज्वाइंट की खरीद की गई।
3. ट्यूबवेलों व इंटेकवेल पर स्थापित स्टार्टर व पैनल में लगने वाले बिजली उपकरण खरीदे गए।
4. जल की शुद्धता के लिए ब्लीचिंग पाउडर का इंतजाम किया गया है।
5. जलापूर्ति व्यवस्था सुचारु रखने के लिए अन्य सामग्रियों की खरीद हुई।



गर्मी में नदियां प्रभावित होती हैं। ज्यों-ज्यों पारा बढ़ता है, जल स्तर पर भी असर पड़ता है। गर्मी के दिनों में सभी नदियों का पानी कम हो जाता है। जल स्तर कम होने से पानी प्रदूषित भी हो जाता है। नदी का पानी सीधे पीने योग्य नहीं रहता।
- राजेंद्र प्रसाद
क्षेत्रीय प्रबंधक
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बांदा।

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गर्मी में केन नदी का पानी घट जाता है। सबसे ज्यादा मई में दिक्कत आती है। नदी का पानी और कम हो जाता है। नदी का पानी इंटेकवेल तक पहुंचाना मुश्किल होता है। हालांकि चैनल बनने के बाद यह समस्या दूर हो गई है, फिर भी मई में होने वाले पानी संकट से निपटने की तैयारी पूरी कर ली है।
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- राजेश श्रीवास्तव
अधिशासी अभियंता
जल संस्थान, बांदा।
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