बांदा। राष्ट्रीय राजमार्ग को गड्ढा मुक्त बनाने की शासन की मंशा पर अधिकारी व ठेकेदार पानी फेर रहे हैं। बाईपास से महोखर गांव तक करीब 300 मीटर सड़क पर गुणवत्ता को दरकिनार कर पैचवर्क का कार्य कराया गया। नतीजतन माह भर में ही सड़क उखड़ गई। अब इसे खोदवाकर दोबारा बनवाया जा रहा है। इसके पहले भी कई बार मरम्मत कराई गई, पर चंद दिन में ही उखड़ गई। इससे फतेहपुर, लखनऊ व कानपुर आदि शहरों के जाने वाले वाहन सवार हिचकोले खाते हुए सफर करते हैं और हादसे होते हैं।
रायबरेली-टांडा नेशनल हाईवे -232 पिछले वर्ष फोरलेन स्वीकृत हुआ था। शासन ने करीब 65 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया था। रायबरेली से बांदा तक करीब 150 किलोमीटर सड़क का काम कार्यदायी संस्था डीपीएस को सौंपा गया। करीब छह माह से चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग की शुरुआत महोखर बाईपास से होती है। इसके आगे शहर की ओर की सड़क लोक निर्माण विभाग के जिम्मे में है। बाईपास से महोखर गांव तक 300 मीटर की दूरी में हाईवे पर करीब 200 गड्ढे हो गए थे। बारिश के समय ही ठेकेदार ने बाईपास चौराहा से महोखर दृष्टि बाधित इंटर कॉलेज तक सड़क में पैचवर्क कराया था। मानकों की जमकर अनदेखी की गई। इस वजह से एक माह में ही उखड़ गई। सप्ताह भर पहले हुई जोरदार बारिश में हाईवे के सारे गड्ढे फिर खुल गए। तारकोल कम लगाने से गिट्टियां भी चारों तरफ बिखर गईं। गुणवत्ता पर सवाल उठे और शिकायतें अधिकारियों तक पहुंची तो ठेकेदार ने दोबारा सड़क खोदवाकर कार्य शुरू किया है।
जनपद की ज्यादातर सड़कें बारिश में खराब हो गई हैं। शासन ने 10 अक्तूबर तक शहर की सभी सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए 20 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। लोक निर्माण विभाग इन सड़कों को गड्ढा मुक्त करने में यह धनराशि खर्च करेगा। करीब 1500 किलोमीटर सड़कों की पैचिंग व मरम्मत के लिए पीडब्ल्यूडी ने शासन से 33 करोड़ रुपये मांगे थे। इसमें से 20 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। अधिकारियों के मुताबिक अभी करीब छह करोड़ रुपये शासन से आए हैं। इसमें तीन करोड़ रुपये का कार्य कराया जा चुका है।
एनएच-232 रायबरेली-टांडा मार्ग को गड्ढा मुक्त करने का कार्य कराया जा रहा है। महोखर बाईपास के पास पैचवर्क हो रहा है। गुणवत्ता खराब मिलने पर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-आलेख सिंह, अधिशासी अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, बांदा