बांदा। पर्यूषण पर्व पर जैन समाज की ओर से धार्मिक अनुष्ठान व आरती-पूजन किए जा रहे हैं। शनिवार को सातवें दिन उत्तम धर्म का पालन किया गया। जैन संत ने कहा कि आत्म शुद्धि के लिए इच्छाओं को रोकना ही तप है। आरती व भजन में महिलाओं की भारी भीड़ रही।
छोटी बाजार स्थित तारण- तरन चैत्यालय पंडित चितरंजन ने कहा कि केवल शरीर को तपाना तप नहीं, अपितु इच्छा का निरोध करना तप है। जिस प्रकार राग-द्वेष-मोह, रूप, मैल भिन्न हो जाए तथा शुद्ध ज्ञान-दर्शनमय आत्मा भिन्न हो जाए, वह तप है। तप ही आत्मा को कर्म मल रहित करता है। तप के प्रभाव से यहां ही अनेक ऋद्धियां प्रकट हो जाती हैं। मुनि सुब्रत नाथ दिगंबर मंदिर में पंडित देवेंद्र शास्त्री ने भी तप धर्म के बारे में बताया। कहा कि कर्मो के क्षय के लिए जो तप किया जाता है, वह तप है। तप 12 प्रकार के होते हैं। पर्व में लोगों ने भजन कीर्तन के साथ जिनवाणी की भक्ति भाव से आरती व चौहार किया। इस अवसर पर प्रदीप जैन, राकेश जैन,मुकेश जैन,मिश्री लाल जैन,प्रकाश,शैलेन्द्र,सनत, मनोज,दिनेश,अन्नू ,आशीष,अर्पित,आर्यन जैन,संजू,बिपिन, रितेश आदि उपस्थित रहे।