मुकदमे की सुनवाई सीजेएम भगवान दास गुप्ता की अदालत में चल रही थी। अभियोजन की ओर से अभियोजक राजेश कुमार ने पैरवी की। दोषी ने अपना जुर्म जज के सामने स्वीकार कर लिया। जज ने एक वर्ष की परिवीक्षा में सदाचरण बनाए रखने की हिदायत दी।
इस दौरान दोषी एक वर्ष तक प्रोवेशन अधिकारी के सामने हर माह की पहली तारीख को उपस्थित होकर हाजिरी देगा। इसके अलावा तीन हजार रुपये का अर्थदंड लगाया, जो पीड़िता को दिया जाएगा। बता दें कि साल 2008 से लेकर 2023 तक इन मामले की 15 साल तक सुनवाई चली।