बांदा। जितना लापरवाह स्कूल प्रबंधन हैं, उससे कहीं ज्यादा लापरवाही संभागीय परिवहन विभाग कर रहा है। स्पेशल कैंप लगाकर वाहनों की फिटनेस कंपलीट करने का दावा जरूर किया जा रहा है, लेकिन एक भी स्कूल वाहन फिटनेस का मानक पूरा नहीं कर पा रहे हैं। बावजूद इसके वाहन चालकों को फिटनेस प्रमाणपत्र थमा दिया गया है।
बुधवार को केन नदी रोड पर स्थित एक विद्यालय में खड़ी बसों की फिटनेस की पड़ताल की गई। पता चला कि छोटे स्कूली वाहन में न तो फायर सिलेंडर हैं और न ही सीसीटीवी। इसके साथ ही वहां खड़ी बसों की दशा भी ठीक नहीं। दो बसों में फायर सिलेंडर मिले, लेकिन उनमें धूल चढ़ी हुई थी। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि अरसे से इनको छुआ तक नहीं गया। तीसरी बस में फायर सिलेंडर भी नहीं था।
इतना ही नहीं इन स्कूली वाहनों में सीसीटीवी कैमरा तो है ही नहीं। ऐसे में ये वाहन फिटनेस के मानक को पूरा नहीं करते हैं। इन वाहनों को फिटनेस प्रमाण पत्र दिया जाना कहां तक उचित है। हालांकि संभागीय परिवहन कार्यालय में स्कूली वाहनों की फिटनेस कंपलीट कराने के लिए कैंप लगाया जा रहा है, लेकिन चेकिंग के दौरान मानकों का ध्यान न रखते हुए फिटनेस प्रमाणपत्र दिए जा रहे हैं। अब तक 24 से अधिक स्कूल वाहनों की फिटनेस कंपलीट की गई है, लेकिन किसी में सीसीटीवी नहीं तो किसी में फायर सिलेंडर और किसी में जीपीएस डिवाइस ही नहीं लगी।
स्कूली वाहनों में नहीं मिली जीपीएस डिवाइस
स्कूली वाहनों में जीपीएस लगानी जरूरी है। स्कूली वाहन शहर के किस मोहल्ले में कहां से छात्र-छात्रा को लेने जाता है और फिर स्कूल से घर छोड़ने जाते समय किस रास्ते से जा रहा है, इससे यह पता लग जाता है। पड़ताल में किसी भी स्कूली बस या छोटे वाहन में जीपीएस डिवाइस चालू नहीं पाई गई। ऐसे में कोई हादसा हो जाए तो ट्रैवलिंग हिस्ट्री भी पता नहीं हो पाती। हद तो यह है स्कूली वाहनों में पुलिस का नंबर भी नहीं लिखा मिला।
फर्स्ट एड बाक्स बस की फर्श पर मिला
स्कूली वाहनों के फिटनेस के नाम पर संभागीय परिवहन विभाग खानापूर्ति कर रहा है। केन पथ स्थित एक विद्यालय के वाहनों की पड़ताल के दौरान बस में लगे फर्स्ट एड बाक्स में दवाइयां तो नहीं मिलीं, अलबत्ता बाक्स जमीन पर पड़ा मिला। शायद फर्स्ट एड बाक्स में दवाइयां ही भरी नहीं गईं। घर से स्कूल और स्कूल से घर आवागमन के दौरान अगर छात्र को चोट लग जाए तो प्राथमिक उपचार मिल पाना भी संभव नहीं है।
वाहनों को पूरी तरह से चेक करने के बाद ही फिटनेस प्रमाण पत्र दिया जाता है। कुछ कमी अगर होती है तो तत्काल उसे दुरुस्त कराने की हिदायत भी दी जाती है। सीसीटीवी और जीपीआरएस सिस्टम भी अपटेड कराने के लिए वाहन चालकों को कहा गया है, सिस्टम चालू कराने के बाद उन्हें एक बार फिर से चेक किया जाएगा। -रामसुमेर यादव, यात्री कर अधिकारी, संभागीय परिवहन कार्यालय।
फिटनेस के मानक
- वाहन का पंजीकरण और प्रदूषण प्रमाणपत्र
- आरटीओ कार्यालय का फिटनेस प्रमाण पत्र
- चालक का ड्राइविंग लाइसेंस
- चालक का पुलिस वेरिफिकेशन
- वाहन पर स्कूल और पुलिस हेल्प लाइन नंबर
- स्कूल वाहन में अग्निशमन यंत्र (फायर सिलेंडर) लगा होना चाहिए
- वाहन में जीपीएस सिस्टम और सीसीटीवी कैमरा लगा होना चाहिए
- स्कूल वाहन में स्पीड कंट्रोल डिवाइस लगा होना भी जरूरी