बांदा। महिलाओं को सामाजिक और पारिवारिक रुढ़ियों के कारण विकास के कम अवसर मिलते हैं। इस कारण उनके व्यक्तित्व का पूर्ण विकास नहीं हो पाता है। महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए बहुआयामी प्रयास की जरूरत है। ये बातें प्राचार्य डाॅ. दीपाली गुप्ता ने एनएसएस शिविर में कहीं।
राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना की प्रथम, द्वितीय और तृतीय इकाई के सात दिवसीय विशेष शिविर का बुधवार छठा दिन रहा। प्राचार्य प्रो. दीपाली गुप्ता ने शिविर का शुभारंभ किया। मुख्य वक्ता सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापक डॉ. वंदना कुमारी ने कहा कि हमारे समाज के विकास के लिए लैंगिक समानता बेहद जरूरी है। प्राचार्य डॉ. दीपाली गुप्ता ने कहा कि समाज की मानसिकता में धीरे-धीरे परिवर्तन आ रहा है। परिणामस्वरूप महिलाओं से संबंधित मुद्दों पर गंभीरता से विमर्श किया जा रहा है।
कार्यक्रम अधिकारी डाॅ. सबीहा रहमानी ने कहा कि महिलाओं को आज भी एक जिम्मेदारी समझा जाता है। उनके व्यक्तित्व का पूर्ण विकास नहीं हो पाता है। डॉ. जितेंद्र कुमार शर्मा, डॉ. माया वर्मा, डॉ. जय कुमार चौरसिया, डाॅ. विनोद सिंह चंदेल, डॉ. वीरेंद्र प्रताप चौरसिया, डॉ. नीतू सिंह, डॉ. संदीप सामंत सिंह, डॉ. सचिन मिश्रा, डॉ. राम नरेश पाल, राशिदा खातून भी उपस्थित रहीं।