बांदा। मनरेगा से कराए गए विकास कार्यों में अनियमिताओं की परतें खुलने लगी हैं। 380 ग्राम पंचायतों में कराए गए विकास कार्यों के भौतिक सत्यापन में सोशल ऑडिट टीमों को 85 लाख से अधिक की अनियमितताएं मिली है। हालांकि अभी 91 ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों का सत्यापन होना शेष है।
जिले में प्रतिवर्ष करीब मनरेगा से 100 करोड़ से अधिक के ग्राम पंचायतों में कच्चे कार्य मेडबंदी, तालाब खोदाई, संपर्क मार्ग में मिट्टी का काम, नहर खुदाई आदि कराए जाते हैं। भारत सरकार मनरेगा से होने वाले विकास कार्यों के सत्यापन के लिए सोशल ऑडिट कराता है।
इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर पर सोशल ऑडिट टीमें लगाई जाती हैं, जो प्रतिवर्ष होने वाले विकास कार्यों का मौके पर ग्राम पंचायत की खुली बैठक में सत्यापन करती हैं। अनियमितताएं मिलने पर इसकी जानकारी शासन व प्रशासन को दी जाती है।
वित्तीय वर्ष 2022-23 में कराए गए विकास कार्यों का सोशल ऑडिट टीम ने सत्यापन किया। 380 ग्राम पंचायतों में 85 लाख से अधिक की अनियमितताएं पकड़ी हैं। जिनकी रिपोर्ट टीमों ने शासन प्रशासन को सौंप दी है।
करोड़ों के कार्यों के नहीं दिए अभिलेख
सोशल ऑडिट टीम को मौके पर ग्राम पंचायतें तीन करोड़ से अधिक के विकास कार्यों के अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए हैं। टीम ने जिला विकास विभाग को दी रिपोर्ट में इसका जिक्र किया है।
केस-1
बिसंडा ब्लाॅक के ग्राम पंचायत बेल्दान में मेड़बंदी, तालाब खोदाई, खड़ंजा निर्माण में 369867 रुपये की अनियमितता पकड़ी गई।
केस-2
जसपुरा के ग्राम पंचायत गाजीपुरा में तालाब खोदाई, मेडबंदी, संपर्क मार्ग के मिट्टी कार्य में 762239 रुपये की अनियमितता मिली।
सोशल ऑडिट में जो अनियमितताएं मिली हैं, उनकी नए सिरे से जांच कराई जाएगी। अनियमितता मिलने पर धनराशि की रिकवरी कराई जाएगी।
रमाशंकर, जिला विकास अधिकारी, बांदा