बांदा। नगर पालिका परिषद में आडिट के दौरान मिलीं खामियों पर अफसरों के जवाब से सरकार संतुष्ट नहीं है। अब इन खामियों की जिला स्तर पर गठित टीमें जांच करेंगी। जिलाधिकारी को समिति का गठन कर फिर से जांच आदेश दिए गए है। वर्ष 2017-18 में आडिट के दौरान नगर पालिका परिषद बांदा सहित नगर पंचायतों में खासी अनियमितताएं पाई गई थी।
वर्ष 2017-18 में लेखा परीक्षा विभाग (प्रयागराज) की टीम ने नगर निकायों सहित अनुदानित संस्थाओं के आय-व्यय का आदि की जांच की थी। जिले में नगर पालिका परिषद बांदा, अतर्रा सहित नगर निकायों में कई खामियां पाई गई थीं। टीम ने आपत्ति दर्ज कराते हुए संबंधित कार्यदायी संस्था से स्पष्टीकरण मांगा।
संस्था ने एक माह के अंदर लेखा टीम में अपना जवाब भेज दिया, लेकिन सरकार इनके जवाब से संतुष्ट नहीं है। सरकार ने जिलाधिकारी को आदेश दिए है कि वह जिला स्तर पर टीम गठित कर फिर से जांच कराएं। इसके बाद से नगर पालिका परिषद बांदा व अतर्रा समेत निकायों में खलबली मची हुई है। धूल फांंक रहे तीन साल पुराने बस्तों को निकालकर दस्तावेजों को खंगाला जाने लगा है। बचाव के रास्ते तलाशे जा रहे।
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी बुद्धि प्रकाश का कहना है कि ऑडिट टीम ने नगर पालिका बालिका विद्यालय में फर्जी नियुक्ति का मामला दर्शा कर शासकीय धन के दुरुपयोग की बात कही थी। आडिट टीम नगर पालिका परिषद से स्कूल के कर्मचारियों के वेतन भुगतान को नहीं मान रही है। उसका कहना है कि विद्यालय निधि से यह भुगतान किया जाए, जबकि पूर्व व्यवस्था के तहत यह भुगतान हुआ है। इसी प्रकार सीवर सक्शन मशीन को खरीदना अनुचित बताया है, जबकि आबादी बढ़ने के साथ ही ये उपकरण खरीदने जरूरी होते हैं। संविदा सफाई कर्मचारियों को सातवां वेतनमान दिए जाने पर आपत्ति थी। इस पर कर्मचारियों से रिकवरी कर ली गई है। नाला सफाई में अतिरिक्त कर्मचारी लगाने के मामले में उनका कहना है कई बस्तियां ऐसी थी जो शहर सीमा के अंदर थी लेकिन ग्राम पंचायत में शामिल थी। शहर के नाले उनसे होकर गुजरते थे, जिन्हें साफ कराने के लिए कर्मचारी लगाए गए होंगे।