बांदा। अतर्रा चुंगी के पास 108 नंबर की चार एंबुलेंस कबाड़ी की दुकान पर मिलने के मामले में जिम्मेदार सही जवाब नहीं दे पा रहे हैं। सीएमओ और प्रोगाम मैनेजर का दावा है कि कबाड़ी के यहां मिली एंबुलेंस जिले में संचालित सरकारी एंबुलेंस नहीं है। उन्होंने कंपनियों द्वारा बैकअप के लिए लगाई गई कंपनी की निजी गाड़ी होने का दावा किया है। फिलहाल इस प्रकरण की जांच जारी है।
शहर के अतर्रा चुंगी के पास 108 की चार एंबुलेंस कबाड़ी की दुकान में रविवार की देर शाम कटते हुए मिलीं थीं। कबाड़ी आरिफ ने बताया था कि चारों एंबुलेंस भूरागढ़ बाईपास पर स्थित वर्कशाप से लाया गया है। इन्हें एक डॉक्टर और एंबुलेंस चलवाने वाली कंपनी के अधिकारी ने बेचा है। इनमें से दो बिना इंजन की थीं। जिन्हें 55 हजार रुपये में खरीदा है। अन्य दो के लिए 65 हजार रुपये चुकाए हैं। बेचने वाले लोगों ने उससे नकद रुपये लिए हैं। इसके साथ ही दो हजार रुपये अलग से लिए थे।
इस संबंध में एंबुलेंस के प्रोगाम मैनेजर शुभम तोमर ने बताया कि जिले में 108 की 23 और 102 की 21 एंबुलेंस संचालित हैं। सभी फिट और अच्छी कंडीशन में हैं। बताया कि कबाड़ी के यहां मिली एंबुलेंस से उनका कोई सरोकार नहीं है। कबाड़ी के यहां मिली एंबुलेंस बैकअप के लिए लगाई गईं कंपनियों की निजी एंबुलेंस हो सकती हैं। इसकी जांच करा रहे हैं। कंडम एंबुलेंस की लखनऊ में कंपनी की ओर से नीलामी कराई जाती है। जो एंबुलेंस कबाड़ी के यहां मिली हैं, वह बांदा की नहीं हैं।
उधर, सीएमओ डॉ. एके श्रीवास्तव का कहना है कि जिले में फिलहाल में एक भी कंडम एंबुलेंस नहीं हैं। कबाड़ी के यहां मिलीं एंबुलेंस की जांच कराई जा रही है। फिलहाल ये बांदा की नहीं हैं। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल परिसर में 12 से अधिक एंबुलेंस जो खड़ी हैं वह कंडम घोषित नहीं हैं। आरटीओ विभाग एंबुलेंस को कंडम घोषित करता है। उनके कंडम घोषित करने पर ही नीलामी कराई जाती है।