सिंधी गुरुद्वारे मेें सिक्ख गुरुओं की प्रतिमाओं के आगे दीप जलाकर आरती करतीं महिलाएं।
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बांदा। गुरु पूर्णिमा की धूम सिंधी गुरुद्वारे में भी रही। सिख गुरुओं की प्रतिमाओं को आकर्षक रूप से सजाया और संवारा गया। शबद, कीर्तन और गीत, भजन के बीच आरती उतारी गई। मंगलवार को यहां स्टेशन रोड पर स्थित सिंधी गुरुद्वारे में गुरु पूजा महोत्सव मनाया गया। सिख और सिंधी समुदाय के महिला-पुरुष श्रद्धालु बड़ी तादाद में शरीक हुए। ढोलक और मंजीरे के साथ भजन और कीर्तन हुआ। हरे कृष्णा-हरे राम, धन्य गुरु टेऊंराम की धुन पर भक्त नाचे और थिरके। गुरु महराज के नारे लगाए। महिला और पुरुषों के अलग-अलग जत्थों में हाथों में सजी थाल और जलते दीपक के साथ टेऊंराम महराज और गुरु नानक देव की प्रतिमाओं की आरती उतारी। प्रतिमाओं के सामने दीप जलाए और चंदन का टीका लगाकर फूलों की माला पहनाई। भगत अमरलाल ने अपने संबोधिन में कहा कि सद्गुरु से ही हमें परमात्मा से साक्षात्कार की प्रेरणा मिलती है। हमारे पापों का नाश होता है। मानिकचंद्र ने कहा कि गुरु शब्द में स्वयं परमात्मा का समावेश है। ग से गोविंद और र से राम होता है। भगत ने भजन भी सुनाया। महोत्सव में मोती पुरसवानी, प्रेमचंद्र आहूजा, अमृतलाल आहूजा, साधूराम, नरेश भटीजा, सुदामालाल, मोहन मूलचंदानी, लालचंद्र मूलचंदानी, नानक इसरानी, अशोक मंगलानी आदि ने गुरुओं की प्रतिमाओं के आगे भोग लगाया और प्रसाद बांटा।