बांदा। अभी बीते दिनों नरैनी में हुई ओलावृष्टि का सर्वे भी न हो पाया था कि मंगलवार की देर शाम खप्टिहां व बबेरू क्षेत्र में फिर से बारिश व ओलावृष्टि हो गई। इससे कई बीघा की फसलों को नुकसान की आशंका है। किसानों के चेहरे भी मुरझा गए हैंं। कहना है कि बेमौसम की बारिश व ओलों ने उन्हें काफी नुकसान पहुंचाया है। बबेरू प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के लगभग 15 से 20 गांवों जिनमें काजीटोला, कबीरपुर ,चौहान डेरा ,पिडारन, बाकल समगरा, सीरिया ताला, शमसुद्दीनपुर, औगासी, करहुली, भभुवा, अघाव आदि गांवों में 100-100 ग्राम के ओले गिरने से फसलों को नुकसान हुआ है। पहले ओले गिरे, इसके बाद गरज चमक के साथ बरसात हुई। इससे लाही, चना, गेहूं, मसूर, अलसी सहित तमाम फसलों का नुकसान हुआ है। काजी टोला के प्रधान आरबी सिंह यादव ने बताया कि ओलावृष्टि से करीब पचास फीसदी फसलों के नुकसान की आशंका है। पीड़ित किसानों ने फसलों का सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की है।
खप्टिहां प्रतिनिधि के अनुसार पैलानी तहसील अंतर्गत क्षेत्र के कुकुवा खास, नरी, पैलानी, पैलानी डेरा, नांदादेव, पडोहरा आदि गांव में देर शाम तेज बारिश के साथ गिरे ओले की वजह से किसान मायूस हैं। पैलानी कस्बे के अरविंद चंदेल, कुकुवा खास के किसान पियूष निषाद आदि लोगों ने बताया की तेज बारिश के साथ बड़े-बड़े पत्थर गिरने से कई कच्चे घरों को भी नुकसान पहुंचा है। कुल मिलाकर बेहद छोटे किसानों को घर और खेती दोनों के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि कब सर्वे होगा और कब मुआवजा हाथ लगेगा क्या पता। दूसरी ओर, एसडीएम पैलानी शशि भूषण मिश्रा ने बताया कि मौके में हल्का लेखपाल को भेज कर जांच कराई जाएगी।
नरैनी में तिरपाल के बजाय बांट गए पन्नी
करीब 10 दिन पूर्व नरैनी तहसील के 400 से अधिक गांव ओलावृष्टि से प्रभावित हुए थे। मुआवजे के लिए किसानों ने जाम लगाकर हंगामा भी किया था। इसके बाद अभी तक प्रशासन का सर्वे ही पूरा नहीं हो पाया है। फिर मुआवजे की कौन कहे। ग्रामीणों का आरोप है कि चार दिन पहले नायब तहसीलदार कच्चे घरों के मालिकों को तिरपाल बताकर पन्नी बांट गए थे। इसकी उन लोगों ने जिलाधिकारी से भी की है।