बांदा। दोनों पैरों से लाचार होकर दिव्यांग की जिंदगी जी रहा युवा मजदूर दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने आया था। रानी दुर्गावती राजकीय मेडिकल काॅलेज में डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर उसकी दिव्यांगता खत्म कर उसे चंगा कर दिया। अब वह फिर से चलने फिरने लगा है।
पड़ोसी जिले महोबा के रेवई गांव का 30 वर्षीय प्रवासी मजदूर मनोज दिल्ली में मजदूरी कर परिवार की परवरिश कर रहा था। इसी दौरान वह बीमार हो गया। धीरे-धीरे उसके दोनों पैर बेकार हो गए। गांव वापस आकर कई डाक्टरों से इलाज कराया, पर सुधार नहींं हुआ। एक साल से वह दिव्यांग हो गया। प्राइवेट अस्पतालों में महंगे इलाज की उसकी हैसियत नहीं थी।
मनोज पिछले हफ्ते दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने के लिए बांदा आया। उसने रानी दुर्गावती राजकीय मेडिकल कालेज में न्यूरो सर्जन डॉ. अरविंद कुमार झा से अपना हाल बयां किया। डॉ. झा ने मनोज की जांच के बाद ऑपरेशन की सलाह दी। मनोज और उसके परिजन राजी हो गए। डॉ. झा ने टीम के साथ ऑपरेशन करके युवा मजदूर के दोनों पैरों की दिव्यांगता दूर कर दी। ऑपरेशन के करीब एक हफ्ते बाद अब मनोज चलने फिरने लगा है। फिलहाल मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य लाभ ले रहा है।
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रीढ़ की नस में पड़ गई थी गांठ
डाॅ. अरविंद ने बताया कि रीढ़ की मोटी नस (एस्पाइनल कार्ड) में गांठ पड़ गई थी। इसकी वजह से दोनों पैर निष्क्रिय हो गए थे। ऑपरेशन करके गांठ निकाल दी गई है। दोनों पैर पूर्ववत बहाल हो गए हैं। बताया कि प्राइवेट अस्पतालों में यही आपरेशन कराने पर दो से ढाई लाख रुपये खर्च आता। मेडिकल काॅलेज में मामूली सरकारी शुल्क में मजदूर को नई जिंदगी मिल गई। प्रधानाचार्य डॉ. एसके कौशल ने डॉ. झा और उनकी टीम को शाबासी दी है।