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Banda News: लहसुन 480 तो हरी धनिया 400 रुपये किलो

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बांदा। बारिश व बाढ़ में सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। तड़का लगाने की सामग्री लहसुन-प्याज और सब्जी की खुशबू बढ़ाने वाली धनिया गरीब व मध्यम वर्गीय परिवार के पहुंच से दूर हो गई है। इससे दुकानों व होटलों में भी खाने-पीने के चीजों के दाम बढ़ा दिए गए हैं। आलू भी फुटकर में 40 रुपये किलो बिक रहा है। लहसुन 480 तो धनिया 400 रुपये किलो बेची जा रही है।
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जनपद में बारिश व बाढ़ ने भोजन का स्वाद बिगाड़ दिया है। गरीबों की थाली से जायका गायब हो गया है। टमाटर जहां 60 रुपये से अधिक दाम पर बिक रहा है। वहीं लहसुन के दाम भी साढ़े चार सौ के पार हैं। महंगाई के चलते सब्जियां अब गरीब और आम लोगों की पहुंच से दूर हो गई हैं। लोग जरूरत से भी कम सब्जियां खरीद रहे हैं। उधर, अरहर, मूंग व मसूर के दाल के दाम भी आसमान छू रहे हैं। गरीबों का आलू भी 40 रुपये तथा प्याज 60 रुपये प्रति किलो बिक रही है। मंडी के थोक सब्जी व्यवसायी दिलीप गुप्ता कहना है कि वर्षा के चलते प्याज, आलू, लहसुन की आवक कम हो रही है। यही महंगाई की वजह है। वहीं स्थानीय स्तर पर वर्षा होने से नदियों के किनारे की सब्जियां खराब हो गई हैं। इससे धनिया फुटकर में 480 रुपये किलो है। टमाटर 60 तो गोभी 200 रुपये किलो है।

थोक में रोजाना खपत

आलू-प्याज के थोक कारोबारी मोहम्मद रईस बताते हैं कि जिले में रोजाना थोक में टमाटर तीन हजार कैरेट, भिंडी साढ़े तीन टन, बैंगन 15 टन, फूल गोभी पांच से सात टन, पत्ता गोभी पांच टन, लौकी तीन टन, शिमला मिर्च दो टन, हरी मिर्च दो टन की खपत होती है। इसके अलावा प्याज, लहसुन, अदरक, हरी धनिया सहित अन्य सब्जियों की भी खपत ज्यादा होती है। थोक बाजार में सब्जियों के दाम काफी कम है, लेकिन फुटकर में विक्रेता इसे अधिक दामों में बेच रहे हैं।
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