बांदा। मध्य प्रदेश की बारिश से केन और यमुना उफना गई हैं। केन का पानी शाम तक खतरे के निशान से डेढ़ मीटर ऊपर पहुंच गया। यमुना भी खतरे के निशान के पास पहुंच गई है। पैलानी, कमासिन क्षेत्र के कई गांवों में पानी भर जाने से आवागमन बंद हो गया है। लोग नावों से आवागमन कर रहे हैं।
केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक शुक्रवार को शाम बांदा में केन नदी का जल स्तर 105.55 मीटर रहा। यह खतरे के निशान 104 मीटर से करीब डेढ़ मीटर ऊपर है। चिल्ला में यमुना का जल स्तर 99.04 मीटर पहुंच गया है। यहां खतरे का निशान 100 मीटर पर है। यमुना में प्रति घंटे दस सेंटीमीटर की गति से पानी बढ़ रहा है। केन शाम पांच बजे के बाद स्थिर है। दोनों नदियों में बाढ़ से पैलानी, जसपुरा, कमासिन क्षेत्र में करीब 30 गांवों में आवागमन बंद हो गया है। लोग सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं। बाढ़ चौकियों को सक्रिय किया गया है। गोताखोर व नावें भी लगाई गई हैं।
आमारा-गौरीकला व तुर्री नाला रपटा से आवागमन बंद
जसपुरा। चंद्रावल और केन नदी के जलस्तर में अचानक तेजी से बढ़ोतरी होने के कारण अमारा और गौरीकला का रपटा पूरी तरह से बंद हो गया है। अमारा, बरेहटा, पडोहरा और मड़ौली खुर्द सहित 12 अधिक मजरे के लोगों का आवागमन बंद है। भिखनी पत्नी बद्रीविशाल निवासी शिवपाल डेरा की अचानक तबीयत बिगड़ी तो उसे लोग नाव से लेकर सीएचसी पहुंचे।
एसडीएम तथा तहसीलदार ने किया दौरा
पैलानी। केन नदी की बाढ़ से शंकर पुरवा पानी से चारों तरफ से घिर गया है। नरी-पलरा संपर्क मार्ग, मरझा-पडोहरा संपर्क मार्ग, मरझा-पंडेरी संपर्क मार्ग, तुर्रा-नाला लसडा संपर्क मार्ग,नांदादेव पडोहरा सहित कई मार्ग जलमग्न हो जाने से कई गांवों से मुख्यालय का संपर्क कट गया है। यहां के लोग कई किलोमीटर दूर से चलकर किसी तरह से मुख्यालय पहुंच रहे हैं। एसडीएम पैलानी शशि भूषण मिश्र तथा तहसीलदार विकास पांडेय ने मौके की स्थिति देखी और नदी किनारे बसे लोगों को सतर्क रहने को कहा।
डीएम ने यमुना किनारे के गांवों की देखी स्थिति
बबेरू। डीएम नगेंद्र प्रताप ने औगासी गांव के पास पुल से यमुना का रौद्र रूप देखा। कहा कि जिस तेजी से यमुना नदी बढ़ रही है, सभी लोग सतर्क रहें। उनके साथ एडीएम राजेश कुमार, सीओ राजबीर सिंह, एसडीएम नमन मेहता, तहसीलदार लखनलाल राजपूत भी रहे। डीएम ने जलालपुर, बाकल, मझीवा में बने रपटों पर नाव व पुलिस तैनात करने को कहा। औगासी, टोलाकाज़ी, मर्का, मुरवल, चरका , कठर, बीरा ,लखनपुर, लोहरा, बेलगवां सहित करीब दस गांवों पर बनी बाढ़ चौकियों में तैनात कर्मचारियों की भी जानकारी ली।
रवाय नदी का रपटा डूबा, कई गांवों में मार्ग बंद
कमासिन। यमुना व कई छोटी नदियों उफान पर हैं। रवाय नदी पर बना रपटा डूब गया है, जिससे औदहा सहित कई गांवों का आवागमन ठप है। किसान अखिलेश पांडेय व राकेश यादव ने बताया कि औदहा का कमासिन मुख्यालय के लिए आवागमन बाधित हो गया है। इसके अलावा गोंड़ा, मुड़वारा मटेहना चरका भी प्रभावित हैं। कमासिन आने के लिए मर्का से घूम कर कई किलोमीटर का चक्कर काटना पड़ रहा है।