एमपी में बांधी गई रंज नदी की जलधारा।
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करतल। रंज नदी की जल धारा को बांधकर बांदा (यूपी) के गांवों का पानी एमपी के ग्रामीणों द्वारा रोकने के मामले में वहां के अधिकारी भी जल धारा बांधने वाले ग्रामीणों के सुर में सुर मिला रहे हैं।
दूसरी तरफ बांदा के अफसरों का कहना है कि उन्हें जानकारी नहीं थी। अब स्थलीय निरीक्षण के बाद उच्चाधिकारियों को अवगत कराकर कार्रवाई की जाएगी।
मध्य प्रदेश से निकली रंज नदी बांदा से होकर गुजरी है। आधा दर्जन से ज्यादा गांव के लोग इसी नदी के पानी से अपने पशुओं की प्यास बुझाते हैं।
अपने इस्तेमाल में भी लाते हैं लेकिन एमपी के ग्रामीणों ने नदी की जल धारा में दीवार खड़ी कर कई स्थानों पर पानी रोक लिया है। नतीजे में बांदा के गांवों में पानी नहीं मिल रहा। पशु प्यासे भटक रहे हैं। मध्य प्रदेश के हिस्से वाली नदी में मवेशियों के जाने पर लोग वापस बांदा की तरफ खदेड़ रहे हैं।
जल धारा रोकने से नाराज बांदा के किसानों ने कहा कि एमपी के लोग बाढ़ का पानी भी हमारी तरफ न आने दें। नदी की धारा रोक लें। उन्होंने कहा कि बाढ़ से तबाही बांदा के गांवों में होती है। गर्मी में पानी के संकट समय में एमपी वाले नदी पर कब्जा कर लेते हैं।
उधर, इस बारे में मध्य प्रदेश के अजयगढ़ के उप जिलाधिकारी पुरुषोत्तम गुप्ता का कहना था कि फिलहाल उन्हें जानकारी नहीं है लेकिन अगर एमपी के लोगों ने अपने क्षेत्र में पानी रोका है तो इसमें किसी को क्या एतराज है ? उधर, नरैनी एसडीएम महेंद्र सिंह ने कहा है कि स्थलीय मुआयने के बाद उच्चाधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया जाएगा। नदी रोकी गई है तो चालू कराई जाएगी।