बांदा। केन नदी रौद्र रूप दिखाने के बाद आखिर घटने लगी। वहीं यमुना नदी का बढ़ता जलस्तर मुसीबत बढ़ा रहा है।
मंगलवार की दोपहर केन नदी का जलस्तर 106.56 मीटर पर पहुंचा तो परेशान हो गए। वहीं यमुना नदी प्रति घंटे 36 सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ रही है। यह शाम चार बजे तक 96.99 सेंटीमीटर पहुंच गई। पैलानी क्षेत्र में 12 गांवों में आवागमन पूरी तरह बंद हो गया। नावों के जरिए लोग तहसील व जिला मुख्यालय पहुंचे। ग्रामीण बाढ़ का पानी गांवों में घुसने से दहशत में रहे। नुकसान से बचने के लिए वह सुरक्षित ठिकानों पर डेरा डाल रहे हैं। वहीं जिला प्रशासन के सख्त निर्देश के बावजूद लेखपाल व सचिव सहित सुरक्षा कर्मी नदारद रहे।
पैलानी संवाद के अनुसार- पैलानी तहसील में नरी-पलरा मार्ग, सिंधन कला मार्ग में तुर्री रपटा के ऊपर केन नदी के बाढ़ का पानी आ जाने की वजह से ग्रामीणों का आवागमन ठप हो गया है। 12 गांवों के बीच रास्ता बंद हो जाने से ग्रामीणों को करीब 15 किलोमीटर अतिरिक्त चक्कर लगाकर पैलानी पहुंचना पड़ रहा है। सिंधनकलां, अदरी, बसधरी, लसड़ा, सिंधन कला के कई मजरों आदि के लोग बाढ़ के चलते घरों में कैद हो गए हैं।
दो वर्ष पूर्व झेली थी बाढ़ की विभीषिका
पैलानी। क्षेत्र के लोगों ने दो वर्ष पहले 2022 में बाढ़ की विभीषिका झेली थी। शंकर पुरवा सहित कई गांव बह गए थे। इस समय यहां के ग्रामीणों में वही दहशत देखी जा रही है। नदी का पानी धीरे-धीरे गांवों की ओर बढ़ रहा है। शंकर पुरवा के खेलावन ने बताया कि पूरी रात ग्रामीण दहशत के चलते जग रहे हैं। कई घर खाली हो गए हैं। प्राथमिक विद्यालयों व ऊंचे टीलों में ठिकाना तलाशा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन चाहे जो दावे कर रहा हो, पर यहां कोई मदद नहीं दिख रही है। लेखपाल व सचिव दो दिन से यहां नजर नहीं आए।
राज्यमंत्री ने लिया बाढ़ पीड़ितों का हाल
पैलानी। जल शक्ति राज्य मंत्री व स्थानीय विधायक रामकेश निषाद ने मंगलवार को पैलानी के सिंधनकला के तुर्री नाला मार्ग व नांदादेव मार्ग का निरीक्षण किया। बाढ़ प्रभावित गांवों में ग्रामीणों का हाल जाना।अधिकारियों को बाढ़ की व्यवस्था पर अलर्ट मोड पर रहने को कहा। निर्देश दिए कि बाढ़ की विभीषिका से बचने के लिए अधिकारी इलाकों में निरंतर कार्य करें।