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Banda News: बाढ़ और बारिश ने बहा दीं 1896 किमी सड़कें

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बांदा। मानसूनी मौसम में जनपद के कई क्षेत्रों में आई बाढ़ और बारिश से सड़कों को भारी नुकसान पहुंचा है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के मुताबिक जनपद में 752 से ज्यादा सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए एक्शन प्लान तैयार किया गया है। सड़कों की मरम्मत के लिए सरकार को 19.74 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है। बजट आने के बाद सड़कों पर कार्य कराया जाएगा।
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जनपद में राष्ट्रीय राजमार्ग हों या फिर स्टेट हाइवे अथवा जिला संपर्क मार्ग बारिश ने सभी को बर्बाद कर दिया है। हाइवे में हुए जानलेवा गड्ढे राहगीरों के लिए हादसे की वजह बन रहे हैं। खासकर रायबरेली-टांडा मार्ग को लें तो यह तिंदवारी से लेकर बांदा तक कई जगह गड्ढे में तब्दील हो गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग ने इसके मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया है। इसी तरह बांदा-हमीरपुर मार्ग, तिंदवारी से बबेरू, बिसंडा से सिंहपुर जाने वाली सड़क की भी यही हालत है। इसके अलावा शहर में भी ज्यादातर सड़कें बारिश में बह गई हैं। लोक निर्माण विभाग की तैयार की गई रिपोर्ट में जनपद की विभिन्न प्रांतीय व जिला स्तरीय सड़कों के नुकसान का आंकलन किया गया है। इन सड़कों की कुल लंबाई 1896.37 किलोमीटर बताई गई है। बाढ़ और बारिश से पैलानी, जसपुरा, तिंदवारी, नरैनी, कमासिन, बबेरू, बदौसा इत्यादि क्षेत्रों में सड़कें ज्यादा क्षतिग्रस्त हुई हैं।



पिछले साल बनी सड़क भी उखड़ी
बांदा। लोक निर्माण विभाग की सड़कों पर हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। यह साल भर में ही बह जाती हैं। पिछले वर्ष शहर की ज्यादातर सड़कों पर मरम्मत का कार्य कराया गया था। इनमें अशोकलाट से महाराणा प्रताप चौक, स्टेशन रोड, पीलीकोठी, जिला पंचायत रोड, जिला पंचायत से खूंटी चौराहा रोत तो नए सिरे बनी थीं। इन सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं।
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हर पहल सड़क में हादसे का भय
-फतेहपुर हाईवे पर बारिश में जगह-जगह पर गड्ढे हो गए हैं, जिससे आने-जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। एक दिन गड्ढे में बाइक जाने पर हादसा होते-होते बचा।
-जीवन, तिंदवारी
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-व्यापारी होने के नाते आए दिन जनपद मुख्यालय बाइक या ऑटो से आना जाना होता है। सड़क में गड्ढों की वजह से कब हादसा हो जाए, इसको लेकर जान हमेशा सांसत में रहती है।
-आशाराम गुप्ता, तिंदवारी


-जिले में 15 सितंबर तक वर्षा का समय है। 15 से 20 सितंबर तक पैचिंग की कार्ययोजना बनाकर शासन को भेजी जाएगी। इसी के हिसाब से बजट मंगाया जाएगा और निर्माण व मरम्मत के कार्य शुरू होंगे।
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-सुरेंद्र कुमार, अधीक्षण अभियंता, लोक निर्माण विभाग, चित्रकूटधाम मंडल


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