बांदा। कोरोना जैसे लक्षण वाले एच3-एन2 वायरस की आशंका जोर पकड़ रही है। चित्रकूटधाम मंडल के चारों जनपदों में बुखार-खांसी के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। हाल ये है कि तीन हफ्ते बीतने के बाद भी खांसी नहीं जा रही। इसमें बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं। उधर, संक्रामक रोग के लिए चारों जिलों के जिला अस्पतालों में 10-10 बेड आरक्षित किए गए हैं। मेडिकल काॅलेज में 50 बेड का अलग वार्ड आरक्षित है।
रानी दुर्गावती मेडिकल काॅलेज समेत सरकारी अस्पतालों से लेकर नर्सिंग होमों में इन दिनों सर्दी-खांसी और बुखार के मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में आने वाले लगभग 20 से 25 फीसदी मरीज बुखार और खांसी के संक्रमित मिल रहे हैं। हालांकि चिकित्सक मौसमी बीमारी मानकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। नए स्ट्रेन एच3-एन2 के लक्षण से फिलहाल इनकार कर रहे हैं। खास बात यह है कि मंडल मुख्यालय बांदा समेत चित्रकूट, महोबा और हमीरपुर में इसकी जांच की कोई व्यवस्था नहीं है।
चित्रकूटधाम मंडल के अपर निदेशक (स्वास्थ्य एवं चिकित्सा) डॉ. विजय पति द्विवेदी का कहना है कि मंडल में नए स्ट्रेन एच3-एन2 का कोई मरीज नहीं है। फिर भी स्वास्थ्य विभाग ने इससे निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। मंडल के सभी जिला अस्पतालों में 10-10 बेड आरक्षित किए गए हैं। संदिग्ध मरीज आने पर जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए उसका स्वॉब और खून का नमूना जांच के लिए लखनऊ भेजा जाएगा। अभी जो मरीज आ रहे हैं वे मौसम के बदलाव के चलते पीड़ित हैं।
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इन बातों का रखें ध्यान
- मास्क लगाएं और दूरी बनाकर रखें।
- छींकते व खांसते समय रुमाल का इस्तेमाल करें।
- हाथों की नियमित सफाई करें।
- वायरल संक्रमित के संपर्क में आने से बचें।
- भीड़भाड़ वाले स्थानों में आने-जाने से परहेज करें।
- बीमार होने पर तत्काल चिकित्सक को दिखाएं।
- मनमर्जी से दवा का इस्तेमाल नहीं करें।
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फोटो-11बीएनडीपी-08 : डॉ. शैलेंद्र यादव।
बुखार-खांसी के रोजाना 60 मरीज आ रहे
बांदा। रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. शैलेंद्र यादव ने बताया कि ओपीडी में रोजाना 200-250 मरीजों में करीब 50-60 बुखार-खांसी के आ रहे हैं। खांसी से परेशान 15 मरीज रोजाना इलाज को आते हैं। खांसते-खांसते दम फूल जाती है। फिलहाल अब तक एच3-एन2 संक्रमण का मरीज सामने नहीं आया है।
डॉ. यादव ने बताया कि सर्दी से गर्मी आने यानी जनवरी से मार्च और गर्मी से सर्दी आने यानी अगस्त से अक्तूबर में सर्दी-खांसी और बुखार के मरीज बढ़ते हैं। बचाव ही बेहतर उपाय है। मेडिकल कालेज में जांच की व्यवस्था नहीं है। संदिग्ध मरीज मिलने पर उसका स्वॉब नमूना लखनऊ पीजीआई जांच को भेजा जाएगा। उधर, प्राचार्य डॉ. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज में संक्रामक रोग से ग्रसित मरीजों के लिए 50 बेड का अलग वार्ड आरक्षित है।
फोटो-11बीएनडीपी-09 : डॉ. हृदयेश पटेल।
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मौसम में बदलाव ने बढ़ाए मरीज
बांदा। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. हृदयेश पटेल ने बताया कि रोजाना 100-150 मरीज बुखार और खांसी के आ रहे हैं। इनमें कई बच्चे भी शामिल हैं। मौसम में बदलाव और होली में भीगने से ज्यादा बीमार हो रहे हैं। कुछ मरीजों की खांसी जल्दी ठीक नहीं हो रही। बुखार तो तीन-चार दिनों में ठीक हो जाता है। फिर भी नए स्ट्रेन को लेकर लोगों को सतर्कता बरतनी जरूरी है।
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