बुंदेलखंड में लाख से लखपति बनेंगे किसान
- मोटे अनाज के साथ लाख की खेती बढ़ाने पर जोर
- किसानों को प्रति एकड़ दो से तीन लाख तक होगा मुनाफा
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। बुंदेलखंड के सातों जिलों के किसान लाख की खेती से लखपति बनेंगे। योजना के तहत किसानों को कम लागत में अधिक आय का अवसर मिलेगा। पहली बार में योजना से पांच हजार किसानों को जोड़ने का लक्ष्य है।
सरकार बुंदेलखंड में श्रीअन्न योजना के तहत किसानों को मोटे अनाज के साथ ही लाख की खेती के प्रति भी प्रोत्साहित करेगी। कृषि उप निदेशक विजय कुमार ने बताया कि बुंदेलखंड के सातों जिलों की ऊसर बंजर 25 हजार हेक्टेयर जमीन पर मोटा अनाज ज्वार, बाजरा, सावां, कोदा आदि और पांच हजार हेक्टेयर में लाख की खेती कराने की योजना है। इसके अलावा फ्लास और बेर के उत्पादन पर भी जोर दिया जा रहा है।
योजना के तहत चयनित प्रत्येक किसान से दो एकड़ में लाख की खेती कराई जाएगी। यह पूरा प्रोजेक्ट फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों के माध्यम से संचालित होगा। इसमें पांच हजार किसानों की आय बढ़ाने में सीधे तौर पर मदद मिलेगी। इस प्रोजेक्ट का उच्च स्तर पर प्रस्तुतीकरण हो चुका है। जल्द इस पर काम शुरू होगा।
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विभिन्न उद्योगों में लाख की मांग अधिक
पेंट, इंक, काॅस्टमेटिक, इलेक्ट्रिक, मोबाइल, रेलवे, पोस्टल विभाग, लकड़ी का फर्नीचर, फूड इंडस्ट्री आदि में लाख की मांग अधिक है। प्रदेश में दो हजार मीट्रिक टन लाख की मांग है। उत्पादन महज 500 मीट्रिक टन होता है। लाख की कमी को छत्तीसगढ़ व झारखंड से पूरा किया जाता है। ऐसे में लाख उत्पादन से बुंदेलखंड के किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
उप निदेशक ने बताया कि लाख की खेती तीन साल तक होती है। पहले साल एक एकड़ लाख की खेती में एक से डेढ़ लाख खर्च आता है। कुल आय दो से तीन लाख तक है। दूसरे साल खर्च एक से डेढ़ लाख तक आता है। शुद्ध आय तीन से चार लाख और तीसरे साल चार से पांच लाख तक होने का अनुमान है। किसानों को इसके लिए प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।
जानिए क्या है लाख
लाख एक बहुउपयोगी रार या रेजिन है। जो एक सूक्ष्म कीट का दैहिक स्त्राव है। कुसुम व फ्लास, बेर और झाड़ीदार पौधों में लाख का उत्पादन होता है। लाख के कीड़े इन पौधों की पत्तियां खाकर अपशिष्ट निकालते हैं। उसी को लाख कहा जाता है।