कमासिन। गोवंशों के संरक्षण के लिए सरकार करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है। इसके बाद भी गोशालाओं में मवेशियों की हालत दयनीय है। गोशाला में मरने वाले मवेशियों को हटाया तक नहीं जा रहा है। उनका मांस चील कौए नोंच रहे हैं।
कोर्रा बुजुर्ग की अस्थायी गोशाला में कागजों में 250 पशु संरक्षित हैं। इनकी देखभाल के लिए चार केयर टेकर नियुक्त हैं, लेकिन किसी को भी मवेशियों की देखभाल की चिंता नहीं है। बाहर से ही धान का पयार डाल दिया जाता है। अंदर मवेशी किस हाल में है देखना भी मुनासिब नहीं समझते।
भूख प्यास से मरने वाले पशु कई-कई दिनों तक पड़े रहते है। इन्हें चील-कौए नोचते हैं। बदबू बढ़ने पर भी इन्हें हटाया जाता है। गांव के रामधनी का कहना है कि ठंड के समय गोशाला में 30 से 35 मवेशियों की मौत हो चुकी है।
प्रधान रामदयाल यादव का कहना है कि सात महीने से एक पैसा नहीं मिला है। मवेशियों को छोड़ा नहीं है, यही एहसान है। सचिव राकेश धर मिश्रा कहना है कि बीमार मवेशियों की सूचना पशु चिकित्साधिकारी को दी जाती है। मृत पशुओं को हटवाकर सम्मान के साथ दफनाया जाता है। खंड विकास अधिकारी अमित यादव का कहना है कि जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।