बांदा। अगले माह से शुरू हो रहे रमजान माह के पहले मदरसों में सालाना जलसे और दस्तारबंदी के आयोजन का सिलसिला जारी है। बीती रात तिंदवारी कस्बे में मदरसा इस्लामिया नूरुल उलूम सिद्दीकिया में जलसा दस्तार बंदी में हिफ्ज का कोर्स पूरा करने वाले तीन तलबा (छात्रों) को पगड़ी बांधकर उलमाओं ने उन्हें दुआएं और इनाम दिए। मदरसा के अन्य छात्रों और उनके शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया।
मदरसा जामा अरबिया, हथौरा के नाज़िम (मुखिया) मौलाना हाफिज कारी हबीब अहमद ने जलसे में कहा कि कुरान को पूरा याद करना बेहद बड़ा अमल है। दीगर तलबा को भी इससे इबरत लेना चाहिए। मौलाना मुसर्रत (हथौरा ) ने कहा कि आपसी रंजिशों और झगड़ों से लानत बरसती हैं। इससे बचें। मौलवी हुजैफा और हाफिज मो. शकील ने नात पेश की।
तीनों तलबा ने हिफ्ज़ का कोर्स महज डेढ़ से दो वर्ष में पूरा किया है। तीनों किशोर अवस्था के हैं। इनमें मोहम्मद कैस व मोहम्मद उवैस (गोयरा मुगली) और अब्दुल लतीफ ( तिंदवारा) शामिल हैं। मौलाना हबीब अहमद, मौलाना नजीब अहमद व मौलाना अनीस तथा मुफ्ती मौलाना अतीक ने तीनों हाफिजों को पगड़ी बांधीं। मदरसा संचालक और जलसे के मेजबान हाफिज दाऊद अहमद ने सभी का स्वागत और शुक्रिया अदा किया। मदरसा के उस्ताद (शिक्षक) हाफिज मो. शकील ने बताया कि उनके मदरसे से अब तक कई सैकड़ा छात्र हिफ्ज व अन्य दीनी कोर्स कर चुके हैं। दीनी तालीम और कोर्स पूरा कर चुके हैं। जलसे में मो. साजिद, हाजी शब्बीर अली कमलू, हाजी वसीम, मुजीब अहमद, डा. मो. सिद्दीक आदि रहे।