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Banda News: नहीं हो रहे सीटी स्कैन, फिर भी साहब बता रहे बेहतर

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बांदा। स्वास्थ्य विभाग के अफसर प्रशासन को गलत सूचना दे रहे हैं। प्रशासन के आला अफसर उनकी सूचनाओं का सत्यापन करने की जहमत तक नहीं उठाते हैं।
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बुधवार को मंडल की समीक्षा बैठक में कमिश्नर बालकृष्ण त्रिपाठी ने बताया कि पूरे मंडल में सीटी स्कैन की सुविधा बेहतर पाई गई है, जबकि हकीकत यह है कि मंडल मुख्यालय बांदा की इकलौती सीटी स्कैन मशीन करीब माह से बंद पड़ी है। जिला अस्पताल स्थित सीटी स्कैन मशीन की बैटरियां खराब हैं। ऐसे में मरीजों को करीब ढाई हजार रुपये देकर प्राइवेट पैथोलॉजी में सीटी स्कैन कराना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में सीटी स्कैन की सुविधा करीब एक माह से ठप पड़ी है। प्रतिदिन 30 से 35 मरीज निजी पैथोलॉजी में ढाई हजार रुपये देकर जांच करा रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक मशीन की 32 बैटरियों के काम न करने की वजह से यह समस्या आ रही है। हालांकि शासन की ओर से साढ़े पांच लाख का बजट मिल चुका है पर बैटरी खरीदने के लिए जैम पोर्टल में प्रक्रिया लंबित है। 24 जनवरी से सीटी स्कैन नहीं हो रहे हैं।
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प्रतिदिन डॉक्टरों की ओर से मरीज को जांच तो लिखी जा रही है, लेकिन जब वह पर्चा लेकर सीटी स्कैन कराने पहुंचता है तो वहां मशीन खराब है का नोटिस चस्पा देखकर बैरंग हो जाता है। बता दें कि जिले में इकलौती सिटी स्कैन मशीन जिला अस्पताल में लगी है।
प्रभारी सीएमएस डॉ. आरके गुप्ता का कहना है कि जैसे ही टेंडर पास होगा, उसके एक-दो दिन के अंतराल में सीटी स्कैन मशीन का संचालन शुरू करा दिया जाएगा।
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