बांदा। चेक बाउंस मामले में प्राइमरी स्कूल की महिला प्रधानाध्यापक को अदालत ने एक वर्ष की कैद और ढाई लाख रुपये जुर्माने की सजा दी है। शहर के सेढू तलैया (अलीगंज) निवासी और परिषदीय स्कूल की प्रधानाध्यापक सुमनलता पत्नी मुकुंद लाल सोनी ने भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा से मकान निर्माण के लिए कर्ज लिया था। कुछ दिनों के बाद कर्ज जमा करने के लिए 23 जुलाई 2014 को सुमनलता ने 1,32,479 रुपये का चेक स्टेट बैंक को दिया। यह चेक सुमनलता ने अपने जिला सहकारी बैंक खाते से जारी किया था। स्टेट बैंक ने चेक कैश कराने के लिए सहकारी बैंक भेजा लेकिन बैंक से यह लिखकर चेक वापस कर दिया गया कि खाते में पर्याप्त धन नहीं है।
स्टेट बैंक ने वकील के जरिए 12 अगस्त 2014 को सुमनलता को नोटिस भेजी लेकिन इसका कोई जवाब नहीं मिला। इस पर शाखा प्रबंधक जीके अग्रवाल ने अदालत में धारा 138 एनआई एक्ट के तहत मुकदमा कर दिया। बैंक के उप प्रबंधक युगुल किशोर गुप्ता के अदालत में बयान हुए। 26 नवंबर 2015 को अदालत ने सुमनलता को सम्मन जारी कर तलब किया। 10 दिसंबर 2015 को सुमनलता ने अदालत में हाजिर होकर 20-20 हजार रुपये की जमानतें दाखिल की और जमानत कराई। लेकिन इसके बाद वह फिर अदालत में नहीं आई। इस उसके विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी हो गया। 16 फरवरी 2016 को फिर जमानत कराई। लेकिन इसके बाद भी अदालत न पहुंचने पर गैर जमानती वारंट जारी कर दिया गया।
इसी बीच मंगलवार को विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम राम किशोर त्रिपाठी ने सुमनलता को एनआई एक्ट की धारा 138 का दोषी पाते हुए एक वर्ष की कैद और ढाई लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर दो माह जेल मेें और रहना होगा। बैंक की ओर से अधिवक्ता संतोष कुमार सिंह ने पैरवी की।