पत्नी को आत्महत्या करने को मजबूर करने पर अदालत ने पति को सात साल सश्रम कारावास और 15 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
गिरवां थाना क्षेत्र के प्रेमपुर गांव निवासी राजाभइया पुत्र शहजादे ने थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा था कि उसने अपनी पुत्री लीला देवी का विवाह अतर्रा थाना क्षेत्र के लोधन पुरवा निवासी श्रीराम उर्फ जयकरन लोध पुत्र रामचरन के साथ की थी। श्रीराम के एक अन्य महिला से अवैध संबंध थे। उल्टा वह लीला पर चरित्रहीनता का आरोप लगाते हुए मारता-पीटता था।
जेठ दादूराम व ऊषा देवी पत्नी करन, चुनुबाद उर्फ सुशील पुत्र बल्देव भी उकसाते थे। परेशान होकर लीला ने 27 जुलाई 2011 को जहर खाकर जान दे दी। डीआईजी के आदेश पर 30 अगस्त को रिपोर्ट दर्ज हुई। चार्जशीट दाखिल होने पर अदालत ने पति के सिवा सभी आरोपियों के नाम हटा दिए।
अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय सुशील कुमार श्रीवास्तव की अदालत में सुनवाई के दौरान सहायक शासकीय अधिवक्ता विमल कुमार सिंह व विवेक सिंह ने पांच गवाह पेश किए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद सोमवार को न्यायाधीश ने श्रीराम को धारा 306 में 7 वर्ष की कैद व 10 हजार रुपये जुर्माना और 498ए में 2 साल की कैद व 5000 रुपये जुर्माना किया।