बांदा। किशोर न्याय बोर्ड द्वारा खारिज की गई किशोर अपचारी की जमानत अर्जी को अपर सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) ने सशर्त स्वीकार कर ली। बाल आरोपी के संरक्षक पिता को दो शर्तों का पालन करने के आदेश दिए।
देहात कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में 19 जून 2016 को नाबालिग के साथ किशोर समेत दो ने छेड़छाड़ की थी। लड़की की मां ने पास्को एक्ट समेत कई धाराओं की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इधर, किशोरी ने घटना से क्षुब्ध होकर 20 जून को खुद को जिंदा जलाकर आत्महत्या कर ली थी।
इस मामले में किशोर आरोपी की जमानत अर्जी किशोर न्याय बोर्ड ने 15 जुलाई को खारिज कर दी थी। इस पर अधिवक्ता शंकर सिंह गौतम ने अपर सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) की अदालत में अपील दायर की। दलील दी कि किशोर निर्दोष है। किशोर न्याय बोर्ड ने जमानत अर्जी सरसरी तौर पर देखकर विधि विरुद्ध आदेश पारित किया है। प्रोबेशन अधिकारी और अभियोजन से भी कोई साक्ष्य नहीं आया।
सहायक शासकीय अधिवक्ता ने अपील का विरोध करते हुए दलीलें दीं। कहा कि आरोपियों की हरकत से किशोरी को आत्महत्या करनी पड़ी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद बुधवार को न्यायाधीश एके मल्ल ने किशोर न्याय बोर्ड के आदेश को खारिज करते हुए किशोर आरोपी की जमानत अर्जी दो शर्तों के साथ मंजूर कर ली। शर्तों में कहा गया है कि निर्धारित तारीख पर आरोपी को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश करना होगा। दूसरी शर्त में पिता से कहा गया है कि वह किशोर अपचारी पर नियंत्रण रखेगा और उसकी देखभाल करते हुए अपराधियों की संगत से दूर रखेगा।