बांदा। सुनामी की लहरों में अपना परिवार गवां बैठे 72 वर्षीय तमिलनाडु के वृद्ध को बुंदेलखंड में तगड़ा झटका लगा। सुनामी में समा गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए इलाहाबाद संगम जाते समय यहां बांदा में जेब उड़ा दी गई। किराए और खाने-पीने को मोहताज हो गए वृद्ध का यहां के कोतवाल सहारा बने।
शुक्रवार को दोपहर हिंदी न बोल पाने वाले वृद्ध पी वासुदेव शहर कोतवाली पहुंचे। अंग्रेजी और कुछ हिंदी में कोतवाली प्रभारी केपी सिंह को अपना दर्द बताया। वृद्ध की आंखें भर आईं। बताया कि वे तमिलनाडु के त्रिवेनीनागा पट्टनम केे रहने वाले हैं।
सुनामी में पूरा परिवार तबाह हो चुका है। वे आज भी कैंप में रहते हैं। मृत परिवार के लोगों की आत्मा की शांति के लिए इलाहाबाद संगम जा रहे थे। बांदा बस अड्डे पर जेब कट गई। पैसे के साथ सुनामी कार्ड भी चला गया।
कोतवाली प्रभारी वृद्ध की इस दास्तान को सुनकर पसीज गए। तत्काल 5000 रुपये दिए और एक होमगार्ड को साथ भेजकर बस अड्डे भिजवाया। वहां से वृद्ध इलाहाबाद के लिए प्रस्थान कर गया।