बांदा। सवा तीन साल पूर्व दलित किशोरी के साथ सामूहिक दुराचार के मामले में अदालत ने तीन अभियुक्तों को 20 साल की जेल और 25 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। एक अन्य अभियुक्त को बरी कर दिया गया। नरैनी कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी पीड़िता के पिता ने 2 दिसंबर 2013 को तहरीर दी थी कि 26 नवंबर की रात गांव के कयामुद्दीन उर्फ पप्पू पुत्र शमसुद्दीन, खालिक पुत्र वाहिद व प्रहलाद पुत्र बौरा और गुड्डन पुत्र राजाराम उसकी पुत्री को बहला-फुसलाकर भगा ले गए और सामूहिक दुराचार किया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 366, 368, 376डीआईपीसी व एससीएसटी एक्ट में रिपोर्ट दर्ज कर ली।
विवेचना क्षेत्राधिकारी (नरैनी) सरजीत सिंह ने की। अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह सेंगर कई गवाह पेश किए। विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी) कैप्टन पीएन सिंह ने शनिवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया। अभियुक्त कयामुद्दीन उर्फ पप्पू, प्रहलाद व खालिक को धारा 376डी व एससीएसटी में 20-20 साल की जेल व 20-20 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। धारा 366 व 368 में 5-5 साल की जेल और 5-5 हजार रुपये जुर्माना किया। जुर्माना अदा न करने पर तीनों अभियुक्तों को अतिरिक्त जेल भुगतना होगी। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। इसी मामले में चौथे अभियुक्त गुड्डन को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया गया।