बलखड़िया अब अपने उस्ताद ठोकिया के नक्शे कदम पर चल पड़ा है। वर्ष 2005 में ठोकिया ने भी तमरार गांव में धावा बोलकर 300 सीमेंट की बोरी नदी में फेंक दी थीं। मजदूरों को खदेड़ दिया था। चौथ वसूलकर ही काम शुरू होने दिया था।
फरवरी 2005 में भी लघु सिंचाई विभाग बदौसा क्षेत्र के तमरार गांव में बान गंगा नदी पर चेकडैम बनवा रहा था। 19 फरवरी को दिनदहाड़े करीब तीन बजे बदौसा से महज पांच किलोमीटर दूर तमरार गांव ठोकिया गिरोह के साथ आ धमका। असलहाधारी लगभग 25 डकैतों ने धावा बोला था।
मजदूरों से ठेकेदार का नाम पूछा। वे नहीं बता पाए तो ठोकिया ने वहां रखी करीब 300 बोरी सीमेंट बान गंगा में फेंक दी। फरमान सुनाया था कि काम तभी शुरू होगा जब ठेकेदार उसे एक लाख रुपये पहुंचा देगा।
ठोकिया ने इसी दिन कुछ देर बाद रसिन बांध मेें काम कर रहे सैकड़ोें मजदूरों को चारों तरफ से घेर लिया था। उन्हें धमका कर भगा दिया। ठेकेदार से पांच लाख रुपये भिजवाने की फरमाइश की थी। कुछ ही देर में ठेकेदार के मुनीम ने यह फरमाइश पूरी कर दी थी।
ददुआ ने भी बोला था चेकडैम पर धावा
अंतर्प्रांतीय इनामी डकैत रहा दस्यु ददुआ भी सरकारी काम रुकवाकर मेठ और मजदूरों को पीटता रहा है। मई 2005 में चित्रकूट जिले के इटवा-गड़रियन पुरवा मार्ग और अमरथी पुरवा रपटा निर्माण का काम चल रहा था। आरईएस के एई और जेई मौके पर थे। इसी बीच दिन में ददुआ गैंग यहां पहुंच गया।
मेठ राजाबाबू को रायफल और बंदूकाें की बटों से मारा-पीटा। दोनों अभियंता जान बचाकर भाग निकले। निर्माण कार्य ठप हो गया। इस घटना के पीछे भी ठेकेदारों द्वारा दस्यु दल को चौथ की रकम न पहुंचा बताया गया है।