बांदा। हत्या के आरोप में पखवारे भर पहले जेल लाए गए बंदी ने जेल की बैरक मेें फांसी लगा ली। फांसी से पहले ब्लेड से हाथ की नसें काट लीं। खून में लथपथ बंदी को पुलिस जिला अस्पताल लाई। यहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। उधर, मृतक के परिजनों ने हत्या बता जेल और पुलिस कार्यालय में हंगामा किया।
पैलानी थाना क्षेत्र के पिपरहरी गांव के राधेश्याम आरख को चिल्ला थाना पुलिस ने 13 मई 2016 को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। उस पर गांव के रिटायर्ड फौजी छेदी सिंह की हत्या का आरोप था। छेदी सिंह का 20 फरवरी को बांदा-चिल्ला मार्ग पर शव मिला था।
पुलिस ने सड़क हादसा मानकर रफा-दफा कर दिया था। परिजनों के दबाव पर राधेश्याम के विरुद्ध पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर उसे जेल भेज दिया। फौजी के परिजन अभी भी अशोक लाट पर अन्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर अनशन पर हैं।
राधेश्याम को जेल में बैरक नंबर-4 में रखा था। बुधवार को तड़के बैरक के शौचालय की लगभग साढ़े पांच फीट ऊंची खिड़की में साफी से फंदे पर वह लटका मिला। अन्य बंदियों ने जेल अधीक्षक को सूचना दी। अधीक्षक एचबी सिंह समेत अन्य जेल अधिकारी तत्काल आ गए और डीएम व एसपी को सूचना दी। पुलिस एंबुलेंस से राधेश्याम को जिला अस्पताल ले गई। वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। बाएं हाथ की नसों में जख्म होने से पूरे शरीर मेें खून लगा था। राधेश्याम की कंबल से ब्लेड भी बरामद हुई।
उधर, राधेश्याम की मौत की खबर मिलते ही परिजन आ गए और जेल गेट पर जमकर हंगामा किया। पत्नी पूजा, बहन कल्ली, मां शांती और अन्य परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया। इसके बाद परिजन पुलिस कार्यालय पहुंच गए। महिलाएं पुलिस अधीक्षक की कार के आगे लेट गईं। एसपी से बातचीत में भी रोष जताया। इनका आरोप है कि तिंदवारी क्षेत्र के सपा नेता की साजिश से राधेश्याम को पूर्व फौजी की हत्या में जेल भेजा गया।
एसपी राजेंद्र प्रसाद पांडेय ने परिजनों को भरोसा दिलाया कि घटना की निष्पक्ष जांच होगी। जो भी दोषी होंगे, उन पर कार्रवाई होगी। इसी बीच एहतियात के तौर पर बड़ी संख्या में पुलिस बुला ली गई। डाक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। गौरतलब है कि इसके पूर्व वर्ष 2011 मेें मानिकपुर (चित्रकूट) निवासी गप्पू ने भी जेल के शौचालय में फांसी लगाकर जान दे दी थी।
परिजन जहां चाहेंगे वह थाना करेगा जांच
बांदा। एसपी राजेंद्र प्रसाद पांडेय ने कहा कि मृतक बंदी के परिजनों से तहरीर मिलने पर निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। बताया कि परिजनों को चिल्ला और पैलानी पुलिस पर संदेह है। इस कारण वे जिस थाना क्षेत्र की पुलिस से चाहेंगे, वहां से जांच होगी।
उधर, जेल अधीक्षक एचबी सिंह ने बताया कि जिस बैरक नंबर-4 में राधेश्याम को रखा था। उसमें 56 बंदी और हैं। बंदियों से मिली जानकारी का हवाला देकर अधीक्षक ने बताया कि राधेश्याम पिछले चार दिनों से परेशान नजर आ रहा था। वह गुमसुम था, खाने-पीने में भी दिलचस्पी नहीं ले रहा था।
दो बार बंदी रक्षकों ने उसे समझाकर खाना खिलाया। बताया कि तीन दिन पहले राधेश्याम की मां उससे मिलने आई थी। इसके बाद भी वह परेशान था। अधीक्षक ने यह भ बताया कि राधेश्याम ने मृतक फौजी छेदी सिंह को अपना अच्छा दोस्त बताया था, जबकि उसी की मौत में उसे हत्याभियुक्त बना दिया गया।
भाई ने की सीबीआई जांच की मांग
बांदा। राधेश्याम के भाई राजू ने डीआईजी को अर्जी देकर बताया कि प्रधानी चुनाव व अन्य कारणों से गांव के ही एक सपा नेता से रंजिश चल रही थी। सपा नेता ने ही सड़क दुर्घटना में मरे छेदी सिंह के मामले को हत्या बनवाकर राधे को फंसवा दिया। राजू ने तीन-तीन सगे भाइयों सहित सपा नेता और चिल्ला थानाध्यक्ष पर राधे की हत्या का आरोप लगाते हुए इन सभी के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराकर सीबीआई जांच की मांग की है।
उधर, जय जनता जनार्दन पार्टी प्रदेश अध्यक्ष गोविंद प्रसाद त्रिपाठी ने डीएम को पत्र देकर कहा है कि फौजी छेदी सिंह की हत्या का मुख्य अभियुक्त काफी असरदार है। पुलिस अभी उसे पकड़ नहीं सकी है। पुलिस का उसे संरक्षण मिला हुआ है।
अदालत से वांटेड होने के बाद भी आरोप और उसके भाई खुलेआम घूम रहे हैं। पैलानी और शहर कोतवाली पुलिस कोर्ट के आदेश का भी पालन नहीं कर रही। जेल में राधे की मौत को संदिग्ध बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की।