कर्ज और आर्थिक तंगी से बेहाल सात बीघा के किसान ने शुक्रवार को सूखे कुएं में कूदकर जान दे दी। वह प्राइवेट फैक्ट्री में चौकीदारी कर रहा था, पर नोटबंदी के बाद फैक्ट्री बंद होने से नौकरी चली गई। उस पर करीब ढाई लाख रुपये का कर्ज था। ऋण माफी में नाम आने के बावजूद कर्ज माफ नहीं हुआ था। इस साल खेतों में बोई गई मूंग और उरद की फसल बारिश से खराब हो गई। इससे वह सदमे में था। उधर, पैलानी एसडीएम ने कहा कि प्रथम दृष्टया जांच में बैंक कर्ज की पुष्टि नहीं हुई।
जसपुरा थाना क्षेत्र के कुम्हरिया डेरा गांव में धीरेंद्र सिंह परिहार (45) ने शुक्रवार की शाम घर के नजदीक स्थित सूखे कुएं में कूदकर जान दे दी। परिजनों और गांव वालों ने शव कुएं से बाहर निकाला। मृतक के भाई स्वतंत्र सिंह ने बताया कि पांचों भाइयों का बंटवारा हो चुका था। धीरेंद्र गांव में पत्नी और दो बच्चों के साथ रहता था। करीब पांच साल पूर्व उसने इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक से एक लाख रुपये का कर्ज लिया था, जो बढ़कर करीब ढाई लाख रुपये हो चुका है। ऋण माफी में नाम आने के बाद भी कर्ज माफ नहीं हुआ। तंगी से भरुआ सुमेरपुर स्थित फैक्ट्री में चौकीदारी कर ली थी, पर नोटबंदी के बाद फैक्ट्री बंद होने से वह बेरोजगार था।
इस साल खेत में बोई मूंग और उरद की फसल पिछले दिनों हुई तेज बारिश से नष्ट हो गई थी। इससे वह परेशान था। कर्ज और आर्थिक तंगी से उसने आत्महत्या कर ली। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। उधर, एसडीएम शैलेश कुमार का कहना है कि फौरीतौर पर जांच में कर्ज की पुष्टि नहीं हुई है। इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक राम प्रसाद ने बताया कि शनिवार को अवकाश होने से बैंक बंद है। इस कारण वे वह कर्ज के बारे में जानकारी नहीं दे पाएंगे। सोमवार को बैंक खुलने पर देखेंगे। प्रबंधक ने वसूली के लिए किसी तरह के दबाव से इनकार किया।