जिला पंचायत में कर समाहर्ता (टैक्स कर्मी) द्वारा करीब पौने दो लाख रुपये का गबन पकड़ा गया है। समाहर्ता ने दुकानदारों आदि से टैक्स वसूल कर जिला पंचायत के सरकारी खजाने में जमा नहीं किया। अब पोल खुलने पर जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी ने गबन की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए शहर कोतवाली को पत्र भेजा है। साथ ही कमिश्नर, डीएम, एसपी आदि को भी अवगत कराया है।
विवरण में पता चला है कि जिला पंचायत में कर समाहर्ता पद पर तैनात ललित किशोर ने जिला पंचायत के भवनों का किराया और लाइसेंस शुल्क आदि की वसूली कर पिछले वर्ष 11 जनवरी से 21 जुलाई 2017 तक कुल 54 रसीदें काटीं। रसीद संख्या 647601 से 647700 तक काटी गईं। इन रसीदों के जरिए 1,60,466 रुपये किराया और 13,920 रुपये लाइसेंस शुल्क (कुल 1,74,386 रुपये) वसूले, लेकिन यह पैसा कर समाहर्ता ने जिला पंचायत की जिला निधि में जमा नहीं किया।
जिला पंचायत के राजस्व निरीक्षक राजाभइया यादव ने वसूली गई पूरी रकम और काटी गई रसीदों का ब्योरा देकर अपनी रिपोर्ट अपर मुख्य अधिकारी को सौंपी। जिला पंचायत के वित्तीय एवं लेखाधिकारी बीके तिवारी ने भी इस बारे में अपर मुख्य अधिकारी को जानकारी देते हुए कार्रवाई को लिखा था।
अब गुरुवार (15 मार्च) को जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी रणमत सिंह ने बांदा शहर कोतवाली प्रभारी को इसकी एफआईआर दर्ज करने के लिए पत्र/तहरीर भेजी है। इसमें कहा है कि कर समाहर्ता ललित किशोर ने जिला पंचायत की दुकानों से किराया वसूला और ग्रामीण व्यवसायियों से लाइसेंस व संपत्ति कर वसूल कर पैसा अपने पास रख लिया।
जमा करने के लिए कई बार आदेश देने के बाद भी नहीं जमा किया। यह स्थायी गबन और सरकारी धन के दुरुपयोग की श्रेणी में है। अपर मुख्य अधिकारी ने अपने इस पत्र की प्रति मंडलायुक्त, डीएम, एसपी और सीडीओ को भी भेजी है। उधर, कोतवाली प्रभारी श्रीनिवास यादव ने बताया कि तहरीर मिलने पर रिपोर्ट दर्ज कर अगली कार्रवाई की जाएगी।