जुलूस के दौरान पिटाई के मामले में विधायक की तहरीर पर 8 साल बाद तत्कालीन एसडीएम, बबेरू के खिलाफ जानलेवा हमला समेत कई धाराओं में कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
बबेरू विधायक विशंभर सिंह यादव वर्ष 2008 में भी सपा से विधायक थे। तब बसपा की सरकार थी।
21 अक्तूबर 2008 को हुई घटना की अब दर्ज कराई रिपोर्ट में विधायक ने कहा है कि सपा के प्रदेश व्यापी पूर्व निर्धारित आंदोलन पर वह समर्थकों के साथ जुुलूस निकाल रहे थे। रामलीला मैदान से शांतिपूर्वक जुलूस कचहरी पहुंचा।
तहसील व कचहरी के बीच में तत्कालीन एसडीएम, बबेरू ज्ञानेश्वर ने ललकारते हुए कहा कि आज मैं तुम्हारी नेतागीरी ठीक कर दूंगा। जान से मारने की नीयत से उनके सिर पर डंडा बरसाने लगे। सिर व जिस्म पर गंभीर चोटें आने से वह बेहोश हो गए। साथ चल रहे वरिष्ठ सपा नेताओं ने बचाना चाहा, तो उन पर भी डंडे बरसाए। तत्कालीन जिलाध्यक्ष इमरान अली राजू, अशोक दीक्षित, लाखन सिंह, संतोष यादव समेत तमाम लोग घायल हो गए। जान से मारने की धमकी देते हुए एसडीएम चले गए।
विधायक ने रिपोर्ट में कहा है कि एसडीएम ने पूर्व में भी कई बार उन्हें धमकी दी थी। विधायक ने तत्कालीन डीएम और कमिश्नर से इस मामले की शिकायत की थी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब सपा सरकार में विधायक ने पैरवी करते हुए उन्हीं शिकायती पत्र के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कराई है।
शनिवार को शहर कोतवाली में दर्ज की गई एफआईआर में एसडीएम के खिलाफ धारा 308, 323, 504 व 506 के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। गौरतलब है कि आरोपी एसडीएम वर्तमान समय में कहां तैनात हैं? यह पता नहीं है। हाल ही में यहां की अदालत ने प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव (कार्मिक) को पत्र भेजकर लूट के एक अन्य मामले में तत्कालीन एसडीएम ज्ञानेश्वर के खिलाफ गैर जमानती वारंट तामील कराने का आदेश दिया है।