लूट के मामले में नामजद एसडीएम मंगलवार को अदालत में पेश हुए। न्यायालय में उन्हें पूरा दिन कटघरे में खड़ा रखा गया। बाद में सशर्त जमानत पर रिहा किया।
इन दिनों गाजियाबाद में तैनात एसडीएम चंद्रभान सिंह पटेल वर्ष 2004 में यहां तहसीलदार थे। बांदा निवासी संतोष कुमार ने उनके सहित संग्रह अमीन के खिलाफ परिवाद दायर कर कहा था कि 31 दिसंबर 2004 को इन दोनों ने उसे स्टेशन रोड में पीटा और 3 हजार रुपए व सोने की चेन छीन ली। केस की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) हरिनाथ पांडेय की अदालत में शुरू हुई। इसी दौरान पटेल पदोन्नत होकर तहसीलदार से एसडीएम बन गए। अदालत ने उन्हें कई बार सम्मन व वारंट भेजे। लेकिन वह अदालत में नहीं पेश हुए। उनकी तैनाती का सही पता न मिलने पर वारंट तामील में दिक्कत हुई। इन दिनों वह गाजियाबाद एसडीएम पद पर हैं।
पिछले माह 24 अक्तूबर को एसडीएम चंद्रभान सिंह अदालत में पेश हुए थे। उन्हें अंतरिम जमानत पर छोड़कर 8 नवंबर को अदालत में आत्मसमर्पण करने और दोबारा जमानत अर्जी देने को कहा गया था। निर्धारित तिथि मंगलवार को वह अदालत में हाजिर हुए। उन्हें अन्य मुल्जिमों के साथ अदालत के कटघरे में शाम 4 बजे तक खड़ा रखा गया। बाद में उन्हें 20-20 हजार की दो जमानतें दाखिल करने के बाद रिहा करने के आदेश दिए। न्यायाधीश ने इस शर्त के साथ जमानत दी है कि वह प्रत्येक तारीख में नियमित रूप से उपस्थित होंगे और पता बदलने (तबादला) पर इसकी जानकारी कोर्ट को दें।