बांदा। डकैती के साथ हत्या के जुर्म में पांच आरोपियों को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुना दी। अदालत से यह फैसला आने में लगभग 24 वर्ष बीत गए। 10-10 हजार रुपये जुर्माना भी किया गया है। एक बदमाश की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई।
मामला जसपुरा थाना क्षेत्र के गाजीपुर गांव का था। यहां के रामचंद्र सिंह ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 26 जुलाई 1992 की रात करीब 12:30 बजे तीन बदमाश आ धमके। उसके भाई किशनपाल सिंह को जगाया और दरवाजा खुलवाने को कहा। किशनपाल ने दरवाजा खुलवाने से इनकार कर दिया।
इस पर बदमाशों ने उस पर लाठी से हमला बोल दिया। शोर सुनकर घर के लोग छत पर चढ़ गए और देखा तो दो बदमाश खड़े नजर आए। कुछ ही देर में यह बदमाश छत से चढ़कर घर के अंदर दाखिल हो गए और उसके पिता के साथ मारपीट करने लगे।
मां मन्ना देवी बचाने आईं तो बदमाशों ने राइफल और बंदूक से फायर कर दिए। गोली लगने से पिता गयाचरण सिंह की मौत हो गई। मां मन्ना देवी के भी जिस्म में कई जगह छर्रे लगे। बदमाशों ने कुल्हाड़ी से दरवाजा काट कर खोला। लगभग दो घंटे तक लूटपाट की। सहमे घर के लोगों ने शोर नहीं मचाया। बदमाशों की संख्या लगभग 11 थी। इनमें आठ लोगों को घर के लोगों ने पहचान लिया। उनके विरुद्ध नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
पुलिस ने विवेचना के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। अभियुक्त साधू सिंह को पुलिस ने रिमांड पर लेकर खेत से बैग बरामद किया। इसमें सिर्फ कपड़े थे। सहायक शासकीय अधिवक्ता आशुतोष मिश्र ने सात गवाह पेश किए। लगभग 24 वर्षों के बाद बुधवार को विशेष न्यायाधीश (डकैती) नरेंद्र कुमार झा ने इस मामले का फैसला सुनाया।
उन्होंने अभियुक्त साधू सिंह, शिव कुमार, भानू, बादी और रामफल को धारा 396 में आजीवन कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न अदा करने पर एक-एक वर्ष और जेल में रहना होगा। जुर्माने की आधी रकम पीड़ित पक्ष को दी जाएगी। अभियुक्त साधू सिंह को धारा 412 में बरी कर दिया। अभियुक्त भइयालाल की मुकदमे के दौरान मौत हो गई।