जांच के समय उपस्थित मदरसा हथौरा के शिक्षक।
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कश्मीरी छात्रों की छानबीन के लिए विश्व विख्यात मदरसा जामिया अरबिया, हथौरा में आए नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) टीम के दो अधिकारियों ने तीन दिनों तक चली जांच-पड़ताल का काम शुक्रवार को पूरा कर लिया। एनआईए ने मदरसा संचालन से जुड़े पांच चुनिंदा लोगों को मदरसे के अभिलेखों के साथ 19 मार्च को दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय बुलाया है।
इस्लामी शिक्षा के मशहूर केंद्र हथौरा गांव स्थित जामिया अरबिया मदरसा में एनआईए के दो अधिकारी डिप्टी एसपी संत कुमार और इंस्पेक्टर एसके चौधरी पिछले तीन दिनों से जांच-पड़ताल कर रहे थे। उनकी जांच का मुख्य बिंदु यहां पढ़ रहे सात कश्मीरी छात्रों पर ज्यादा रहा। यहां का एक पूर्व छात्र (तलबा) तौसीफ कश्मीर में आतंकी आरोप में पकड़ा गया है। वह वहां जेल में है। उसी की जांच-पड़ताल में यह टीम आई थी। एक अन्य फरार आरोपी के बारे में भी एनआईए सुराग तलाश रही है। कश्मीरी छात्रों, मदरसा प्रबंधकों और शिक्षकों से उनके बारे में तीन दिनों तक लगातार पूछताछ की। बुधवार को एनआईए सदस्यों ने मदरसा छात्रों से पूछताछ के दौरान कुछ लिखवाकर भी लिया। गुरुवार को पूरा दिन मदरसे में ही जांच-पड़ताल की।
शुक्रवार को एनआईए सदस्य मदरसा नहीं गए। अलबत्ता मदरसा संचालक मौलाना मुफ्ती नजीब अहमद और कुछ शिक्षकों को देहात कोतवाली बुलाकर कई घंटे पूछताछ की। मदरसा के रसोइया से भी जानकारियां लीं। मदरसा के कुछ अभिलेख भी देखे। यह सिलसिला दोपहर 12 से शाम 5 बजे तक चला। एनआईए टीम ने मदरसा के मुफ्ती नजीब अहमद सहित पांच शिक्षकों को नोटिस देकर कहा कि वह 19 मार्च को एनआईए के दिल्ली स्थित मुख्यालय में मदरसा के अभिलेखों के साथ उपस्थित हों। उधर, मदरसा के मुफ्ती नजीब अहमद ने बताया कि एनआईए ने जो भी अभिलेख मांगे उन्हें दिखाए गए हैं। कहा कि मदरसे की जो छवि है वह पूरा जनपद और प्रदेश व देश के सभी वर्ग के लोग बखूबी जानते हैं। जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा। कहा कि किसी भी गलत गतिविधियों में मदरसा कभी सहयोगी या शामिल नहीं रहा।
छात्रों के आक्रोश, मौलवियों ने किया खामोश
बांदा। एनआईए की टीम ने तीनों दिन अपनी जांच-पड़ताल अपने अंदाज और तेवरों में की। मीडिया को कुछ भी बताना मुनासिब नहीं समझा। पहले दिन वह कई घंटे हथौरा मदरसे में रहे। मदरसे के अन्य लोगों को भनक भी नहीं लगी। दूसरे दिन जांच में यह भनक लगने पर कि कश्मीरी छात्रों से पूछताछ के दौरान कुछ सख्ती की जा रही है तो मदरसे के छात्र मदरसा परिसर में ही इकट्ठा हो गए। उनमें रोष पनपने लगा। मदरसा समर्थक और हमदर्द भी खासी संख्या में पहुंच गए। इनमें हिंदू-मुस्लिम सभी थे, लेकिन मदरसा के मौलवियों ने छात्रों को समझा-बुझाकर काबू में रखा। कई बार स्थिति काफी तनावपूर्ण होती बची। कुछ लोगों का कहना था कि कोई भी जांच एजेंसी सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की अनदेखी करके जांच नहीं कर सकती। पूछताछ के समय छात्रों के अभिभावकों या अधिवक्ता को भी बुलाया जाना चाहिए।