एक-दूसरे के जानी दुश्मनों को एक ही चहारदीवारी में
कैद किए जाने से मंडल जेल में गैंगवार जैसी गंभीर घटनाआें के आसार हो गए
हैं। एक, दो नहीं दर्जन भर से ज्यादा खतरनाक और कुख्यात अपराधी इस जेल में
हैं।
रविवार को गौतमबुद्ध नगर जेल से लाए गए डी-11 गैंग के कुख्यात
बंदी सिंहराज की जेल में इंट्री के बाद जेल अधीक्षक ने इस खतरे से शासन और
कारागार महानिदेशक को आगाह करा दिया है।
बांदा जेल में लगभग 16
बैरक हैं। इनकी क्षमता 567 बंदियों की है पर मौजूदा समय में बांदा और
चित्रकूट के करीब 1250 बंदी कैद हैं। स्टाफ की भी कमी है। महत्वपूर्ण पद
जेलर की कुर्सी खाली है।
जेल में ददुआ, ठोकिया और बलखड़िया गिरोहों
के दर्जन भर से ज्यादा डकैत बंद हैं। इनके अलावा दूसरे जनपदों की जेलों से
यहां भेजे गए 13 खतरनाक बंदी भी हैं। इन सबको एक साथ काबू में रखना जेल
प्रशासन के लिए खासी चुनौती है।
गौतमबुद्ध नगर (ग्रेटर नोएडा) जेल
से यहां भेजे गए सिंहराज को लेकर जेल प्रशासन चिंतित है। बात भी चिंता की
है। दरअसल कुछ दिन पहले अभियुक्त अनिल दुजाना और योगेश को भी ग्रेटर नोएडा
से बांदा जेल भेजा गया था। दोनों यहीं बंद हैं।
सिंहराज और दुजाना व
योगेश के बीच दुश्मनी है। सिंहराज भाटी को बांदा जेल भेजने संबंधी दो दिन
पूर्व अखबारों में छपी खबर के बाद अनिल दुजाना ने तत्काल बांदा जेल अधीक्षक
को अर्जी देकर सिंहराज से दुश्मनी का हवाला देकर सुरक्षा की मांग की।
वरिष्ठ
जेल अधीक्षक हरिबक्श सिंह ने हालात की गंभीरता को भांप प्रदेश के पुलिस
महानिदेशक (कारागार) सहित अन्य अफसरों को पत्र भेजकर कहा कि कुख्यात परस्पर
विरोधी गुटों के इन बंदियों को एक साथ जेल में रखे जाने से गैंगवार एवं
अति गंभीर घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। अधीक्षक ने सिंहराज को किसी और
जेल भेजने का अनुरोध किया है।