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भूमि संरक्षण लिपिक ने फांसी लगाई

Mon, 29 Jan 2018 10:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो , बांदा
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मृतक अशोक पाठक की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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भूमि संरक्षण एवं जल संसाधन कार्यालय के लिपिक ने अपने आवास में फांसी लगाकर जान दे दी। सुसाइड नोट में कार्यालय के एक पूर्व कर्मचारी द्वारा परेशान किए जाने तथा बीमारी से हताश होने की बात लिखी है। 10 दिन के अंदर जिले में सरकारी कर्मचारी की आत्महत्या की यह दूसरी घटना है।

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मूलरूप से गायत्री नगर कानपुर निवासी अशोक पाठक (58) यहां भूमि सिंचाई एवं जल संसाधन यूनिट में करीब एक दशक से कार्यरत थे। परिवार कानपुर में रहता है। अशोक यहां शंकर नगर में किराए के मकान में अकेले रहते थे। सोमवार की सुबह उन्होंने कमरे की छत पर अंगोछा बांधकर फांसी लगा ली। सुबह कार्यालय का चतुर्थ श्रेणी कर्मी चाबी लेने आया तो शव लटका देखा। उसने तत्काल विभागीय अधिकारियों को सूचना दी। कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंची।

मृतक के बिस्तर पर पुलिस को सुसाइड नोट मिला। इसमें लिखे फोन नंबर से पुलिस वालों ने घर वालों को सूचना दी। पत्नी सुरेंद्रा देवी, भाई अनिल कुमार उर्फ राजू समेत कई परिजन कानपुर से पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। पोस्टमार्टम के बाद शव लेकर कानपुर रवाना हो गए। मृतक ने सुसाइड लेटर अपने बड़े भाई राजू के नाम संबोधित किया है। इसमें कार्यालय के एक पूर्व कर्मचारी द्वारा धोखाधड़ी से हस्ताक्षर करा लेने की बात कही गई है।
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उधर, भूमि एवं जल संसाधन अधिकारी रमेश चंद्रा ने फोन रिसीव नहीं किया, जिससे विभागीय पक्ष नहीं जाना जा सका। गौरतलब है कि 10 दिन पूर्व कमासिन में कार्यरत पंचायत विभाग के एडीओ लालमणि यादव ने भी अपने सरकारी आवास पर फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली थी।

सुसाइड नोट में पूर्व कर्मचारी पर फंसाने का आरोप
सुसाइड लेटर में लिपिक अशोक पाठक ने कहा है कि आफिस के पूर्व कर्मचारी उसे फंसाकर चले गए। डुप्लीकेट चाबी से चार्ज लेकर कुछ अभिलेख निकाल लिए। मेरे भवन की अग्रिम कटौती त्रुटिपूर्ण मेरी राइटिंग में बनवाकर मेरे हस्ताक्षर करवा लिए। इससे मैं दिन-रात बेचैन रहता था, जिससे मुझे शुगर हो गई। अपने भाई राजू को संबोधित सुसाइड लेटर में अशोक ने लिखा है कि शिवम उर्फ अभय (पुत्र) को नौकरी देने का प्रयास करना।

मेरा क्लेम अपनी भाभी सुरेंद्रा (पत्नी) को दे देना। मैं इस दुनिया को छोड़कर हताश होकर जा रहा हूं। मेरे क्रियाकर्म में पैसा न बर्बाद करना। एक बीघा खेत बेचकर लोन जमा कर देना। मेरे खाते में 21 हजार रुपये लोगों से उधार लेकर रखे हुए हैं। क्लेम मिलने पर उन्हें दे देना। सुसाइड लेटर में अपने साथ धोखाधड़ी करने वाले कर्मचारी को बहुत गंदा बताया है।

पत्नी बोली-विभागीय काम का ज्यादा था दबाव
मृतक की पत्नी सुरेंद्रा देवी ने पोस्टमार्टम हाउस में बताया कि पति पर विभागीय कामकाज का दबाव था। कैशियर सहित कई अन्य पटलों का काम उन्हें सौंप रखा गया था। इससे वे काफी तनाव में रहते थे। तीन दिन पहले ही फोन पर बताया था कि दो महीने से छुट्टी के लिए अधिकारियों से कह रहे हैं, पर अवकाश नहीं दिया जा रहा। त्योहार पर भी घर नहीं आ पाता था।
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