बांदा। ससुराल में युवती को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के जुर्म में अदालत ने पति और ससुर को सात-सात साल की कैद और तीन-तीन हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर एक साल की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
चित्रकूट जिले के तीरघुमाई गंगू (राजापुर) गांव के मथुरा पुत्र बच्चू ने बदौसा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसने अपनी पुत्री कुसुमकली की शादी मई 2002 में कुल्लूखेड़ा (बदौसा) निवासी शिवशंकर के पुत्र राजेश केवट के साथ की थी। शादी के बाद बच्चे न होने पर पति और ससुर कुसुम को बांझ कहकर ताना मारते थे।
यह भी आरोप लगाया कि पुत्री के पति के गांव की एक अन्य महिला से अवैध संबंध थे। पति और ससुर की प्रताड़ना से परेशान होकर 19 जुलाई 2010 को कुसुम कली ने ससुराल में अपने ऊपर मिट्टी का तेल छिड़कर आग लगा ली। उसकी वहीं मौत हो गई।
विवेचना के बाद पुलिस ने अदालत में राजेश और उसके पिता शिवशंकर के विरुद्ध आईपीसी की धारा 306 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया। अपर जिला सत्र न्यायाधीश अरुण कुमार मल्ल की अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता शिवभूषण वर्मा ने 7 गवाह पेश किए। गुरुवार को अदालत ने पिता-पुत्र को कैद व जुर्माना की सजा सुनाई। जेल में बिताई अवधि सजा में समायोजित होगी।