बांदा। दहेज हत्या में पति और जेठ को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। जेठानी को सात साल जेल में बिताने होंगे। बूढ़ी हो चुकी सास को बरी कर दिया गया। कमासिन थाना क्षेत्र के भीती गांव निवासी अयोध्या प्रसाद यादव ने 15 अक्तूबर 2011 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि अपनी पुत्री संवरिया की शादी छह वर्ष पूर्व पछौंहा गांव निवासी जयपाल के पुत्र लल्लू के साथ की थी।
हैसियत के मुताबिक दान दहेज दिया था। ससुराल वाले 20 हजार रुपये और एक भैंस की मांग कर उसकी पुत्री की लगातार प्रताड़ित करते रहे। अंतत: सास, जेठ, जेठानी और पति ने पुत्री को जलाकर हत्या कर दी। पुलिस ने चारों के विरुद्ध दहेज हत्या आदि की रिपोर्ट दर्ज की। विवेचना के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।
अभियोजन की ओर से एडीजीसी फेरन सिंह यादव ने आठ गवाह पेश किए। शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश (एससीएसटी एक्ट) हरीनाथ पांडेय ने इस मुकदमे का 27 पृष्ठीय फैसला सुनाया। आरोपी पति लल्लू और जेठ आशाराम उर्फ सुमेरा को धारा 304 बी में उम्रकैद की सजा सुनाई।
इसी धारा में जेठानी मुन्नी देवी को सात वर्ष की सश्रम कैद से दंडित किया। सास कुंवरिया को बरी कर दिया। पति और जेठ को अन्य धाराओं में भी कैद और जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त कैद भुगतने के आदेश दिए। जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित होगी।