बांदा। दो पक्षों के बीच हुई गोलीबारी में युवक की मौत मामले में अदालत ने दो सगे भाइयों समेत तीन लोगों को 5-5 वर्ष की कैद और जुर्माना की सजा सुनाई। अन्य धाराओं में भी अलग-अलग सजा और जुर्माना हुआ। फैसला करीब 13 साल बाद हुआ। कोतवाली देहात के पचनेही गांव निवासी रामदेव सिंह पुत्र सूरज सिंह ने 7 जुलाई 2003 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसका पुत्र चंद्रभूषण सिंह सुबह 9 बजे बांदा जा रहा था। गांव में ही श्रीपाल के घर के पास दो सगे भाइयों उत्तम सिंह व निर्मल सिंह पुत्रगण नारायन सिंह और संता सिंह व सागर सिंह पुत्रगण अभिलाष सिंह ने गोली चला दी। चंद्रभूषण के सीने में गोली लगने से मौत हो गई। उधर, जवाब में चंद्रभूषण पक्ष के लोगों ने भी गोलियां चलाईं।
पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर तफ्तीश की और अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता फेरन पाल सिंह व राजेंद्र सिंह ने 8 गवाह पेश किए। अपर सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय द्वितीय अनिल कुमार ने बुधवार को इस मुकदमे का फैसला सुनाया। लगभग 13 वर्ष के बाद सुनाए गए फैसले में अदालत ने दो सगे भाइयों संता सिंह व सागर सिंह और निर्मल सिंह को धारा 304 में 5-5 वर्ष की जेल व 5-5 हजार रुपये जुर्माना और धारा 324 में 2-2 वर्ष की कैद व 2-2 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। सागर व निर्मल को धारा 25 में एक वर्ष की जेल और एक हजार रुपये जुर्माना से भी दंडित किया गया। जुर्माना अदा न करने पर तीनों अभियुक्तों को 6-6 माह अतिरिक्त जेल भुगतना होगी। अभियुक्त उत्तम सिंह की मुकदमें के दौरान मौत हो चुकी है।