आर्थिक तंगी के चलते वृद्ध किसान ने जहर खाकर जान दे दी। वह आवास और अंत्योदय कार्ड की फरियाद के लिए अधिकारियों से मिलने के लिए घर से निकला था।
अतर्रा तहसील के बदौसा थाना क्षेत्र के देवखेर गांव निवासी मूलचंद्र (65) पुत्र हीरालाल बुधवार को दोपहर घर से बांदा आने को कहकर निकला था। बदौसा स्टेशन से उसे बांदा के लिए ट्रेन में बैठना था। बदौसा स्टेशन में ही उसने जहर खा लिया। हालत बिगड़ने पर बताए गए पते पर परिजनों को सूचना दी गई। परिजन उसे जिला अस्पताल लाए।
यहां कुछ ही देर में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। गुरुवार को पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। मृतक के पुत्र राकेश ने बताया कि नौ साल पहले बड़े भाई दिनेश ने भी आत्महत्या कर ली थी। पिता के नाम तीन बीघा जमीन है। मां और भाई दिनेश की पत्नी व बच्चों के पालने की जिम्मेदारी भी उसी पर थी। तीन साल से दैवी आपदा और सिर्फ तीन बीघा जमीन में पेट पालना मुश्किल था। झोपड़ीनुमा कच्चे मकान में बसर करते हैं।
मूलचंद्र आवास और अंत्योदय राशन कार्ड की मांग करने जिलाधिकारी के यहां जाने के लिए घर से निकला था। उसके पास से प्रार्थना पत्र भी बरामद हुआ है।
अतर्रा एसडीएम अरविंद कुमार तिवारी ने बताया कि मामले की जांच कराई जाएगी। अगर वह आवास व अंत्योदय कार्ड के लिए पात्र निकला तो इसके लिए जिम्मेदार कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
किसान मूलचंद्र ने आत्महत्या के पहले जिलाधिकारी के नाम सुसाइड नोट लिखकर जेब में रख लिया था। इसमें कहा गया है कि वह किसी विवाद के चलते आत्महत्या नहीं कर रहा। वजह ये है कि उसने उच्चाधिकारियों को अंत्योदय राशन कार्ड और आवास के लिए सैकड़ों बार प्रार्थना पत्र दिया। लेकिन सुनवाई नहीं हुई। वह दूसरे के मंदिरनुमा टूटे-फूटे खंडहर में रह रहा है। कभी-कभी बच्चे एक रोटी के लिए भी मोहताज हो जाते हैं।
तीन साल पहले भी उसने जहर खाकर आत्महत्या की कोशिश की थी। वह अपनी विधवा बहू और असहाय नाती के लिए आवास चाहता था। अंत्योदय राशन कार्ड के संबंध में भी जिला पूर्ति अधिकारी 4 मार्च 2016 को अतर्रा तहसील के पूर्ति निरीक्षक को जारी पत्र में एक सप्ताह के अंदर आवेदक मूलचंद्र को अंत्योदय कार्ड के संबंध में कार्रवाई की जनसूचना के तहत उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे।