इलाज के पर्चे दिखाता मृतक का साला देवीदयाल।
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निजी अस्पताल में इलाज के बाद दलित वृद्ध की मौत पर परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। चिकित्सक क्लीनिक बंद कर भाग निकला। परिजन शव थाने ले आए और यहां भी हंगामा किया। पुलिस ने आनन-फानन शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। परिजनों ने डाक्टर पर गलत इलाज का आरोप लगाते हुए थाने में तहरीर दी है। थाना पुलिस का कहना है कि जांच की जा रही है।
गिरवां थाना क्षेत्र के बनसखा गांव का दलित रामऔतार (65) पुत्र रामकुमार को हाथ में चोट लग जाने के बाद इंफेक्शन हो गया था। परिजन उसका इलाज चौक बाजार स्थित एक क्लीनिक में करा रहे थे। शनिवार को क्लीनिक के डाक्टर ने उसे इंजेक्शन लगाया और दवाएं दी। वृद्ध की कई जांचें भी कराई। परिजन रामऔतार को लेकर घर चले गए। रविवार को हालत बिगड़ने पर उसे फिर क्लीनिक लाए।
परिजनों का आरोप है कि डाक्टर ने मरीज को देखने के बाद अस्पताल से बाहर जाने को कहा। इससे परिजन भड़क गए। डाक्टर से उनकी नोकझोंक भी हुई। इस बीच डाक्टर क्लीनिक में ताला डालकर भाग गया। कुछ ही देर बाद वहीं रामऔतार की मृत्यु हो गई। परिजन शव लेकर थाने आ गए और यहां भी हंगामा किया। इंसपेक्टर नीरज कुमार सिंह ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से मौत की पुष्टि होने के बाद शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भराने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। साथ ही परिजनों द्वारा दी गई तहरीर पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
मृतक की पत्नी भूरी व साला देवीदयाल ने बताया कि डाक्टर के दवाओं का पर्चा भी उनके पास सुरक्षित है। तीन हजार रुपये भी लिए। कर्ज लेकर यह पैसा दिया था। मृतक पेशे से ट्रक ड्राइवर था। उधर, आरोपी चिकित्सक का कहना है कि उनके पास लाने से पहले परिजनों ने मरीज का इलाज खुरहंड के एक अस्पताल में कराया था। वहीं हालत बिगड़ी।