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दरोगा अदालत में बोला- हुजूर जो कहें ‘सेवा’ को तैयार हूं

Wed, 06 Jun 2018 11:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
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कोर्ट
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‘साहब मुल्जिम नहीं मिल रहे हैं। हुजूर जो आप कहें मैं ‘सेवा’ करने को तैयार हूं’। भरी अदालत में मजिस्ट्रेट के समक्ष दरोगा की गई यह पेशकश उसे महंगी पड़ गई। मजिस्ट्रेट ने कड़ी फटकार लगाते हुए इसे अदालत की अवमानना बताया। मुकदमा चलाने के आदेश दिए। 12 जून को फिर सुनवाई होगी। 

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नरैनी थाना क्षेत्र के जमवारा गांव निवासी आरोपी लाखन व बाबूलाल पुत्र जग्गी लोहार वर्ष 1992 से धारा 5/25 शस्त्र अधिनियम के मामले में वांछित हैं। दोनों कोर्ट से फरार चल रहे हैं। दोनों आरोपियों के खिलाफ द्वितीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत से कई साल पहले गैर जमानती वारंट जारी हुआ था। नरैनी कोतवाली के एसआई राममूरत पटेल ने लाखन व बाबूलाल को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश नहीं किया।

गलत आख्या लगाकर वारंट को अदालत में वापस कर दिया। सोमवार को अदालत में पेश हुए दरोगा राममूरत पटेल ने गिरफ्तारी संबंधी संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया। द्वितीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. सुरेश कुमार ने कारण पूछा तो दरोगा ने कहा कि ‘साहब मुल्जिम नहीं मिल रहे हैं। हुजूर जो आप कहें मैं सेवा करने को तैयार हूं’।
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इस पर मजिस्ट्रेट ने इसे अदालत की तौहीन मानते दरोगा को कड़ी फटकार लगाई। कहा कि ऐसा आचरण न्यायालय की गरिमा के खिलाफ है। न्यायालय इसकी कड़े शब्दों में निंदा करती है। मजिस्ट्रेट ने दरोगा के खिलाफ धारा 349 सीआरपीसी के तहत कोर्ट की अवमानना पर मुकदमा चलाए जाने जाने का आदेश दिया। आदेश की प्रति डीआईजी व एसपी को भी भेजी है। मामले की सुनवाई के लिए 12 जून की तिथि नियत की है। कहा है कि उक्त तिथि में दरोगा खुद व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण दें।

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