बांदा। जेल में विचाराधीन बंदियों को 24 घंटे का पैरोल जिलाधिकारी दे सकते हैं। इसका अधिकार प्रदेश सरकार ने दे दिया है। अब तक यह प्रदेश सरकार के पास है। साथ ही पैरोल प्राप्त करने के लिए प्रक्रिया भी पेचीदा है।
प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार ने अब जेल में बंद बंदियों पर अपनी नजरे इनायत की है। गंभीर केस में तमाम बंदी लंबे समय तक जेल में रहते हैं। इनमें कुछ को अदालत से सजा हो जाती है। वह सजायाफ्ता होते हैं। जबकि ज्यादातर विचाराधीन बंदी होते हैं। इनका मुकदमा अदालत में चल रहा होता है। जमानत नहीं मिल पाती।
ऐसे में बंदी के किसी परिजन की मृत्यु पर बंदी को अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति शासन या अदालत से मिलती रही है। इसमें काफी पापड़ बेलने पड़ते हैं। बिना सोर्स सिफारिश वाले कैदियों को अक्सर पैरवी के अभाव में पैरोल नहीं मिल पाता था। वह अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाते। अब पता चला है कि नई व्यवस्था के तहत कैदियों के परिजनों की मृत्यु होने पर कैदी जिलाधिकारी को पैरोल पर रिहा करने के लिए अर्जी दे सकेगा। जिलाधिकारी संतुष्ट होने पर इस अर्जी को मंजूरी देकर बंदी को एक निर्धारित समय के लिए पैरोल पर रिहाई दे सकेंगे। हालांकि इस बारे में अभी यहां जेल, प्रशासन या प्रोबेशन विभाग ने पुष्टि नहीं की है। जेल अधीक्षक एचबी सिंह ने कहा कि उन्हें भी इसकी जानकारी मिली है लेकिन अभी कोई शासनादेश नहीं आया है। उधर, प्रोबेशन विभाग के अधिकारी एसएन त्रिपाठी ने भी शासनादेश प्राप्त न होने की बात कही है।