बांदा। मौजूदा और पूर्व डीआईओएस, दो लिपिकों और पूर्व प्रधानाचार्य के विरुद्ध रिटायर्ड लिपिक ने धोखाधड़ी और अभिलेखों में हेराफेरी आदि की कई संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
डीएवी इंटर कालेज के रिटायर्ड लिपिक श्रीप्रकाश द्विवेदी की तहरीर पर न्यायालय के आदेश से शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज हुई है। इसमें लिपिक ने बताया कि वह 31 मार्च 2018 को सेवानिवृत्त हुआ था। तत्कालीन प्रधानाचार्य और लिपिक ने सेवा पुस्तिका में उसकी नियुक्ति तिथि में फर्जी तिथि अंकित कर दी और उसका वेतन रोक दिया गया।
उसकी रिट पर हाईकोर्ट ने हर माह का वेतन और सेवा यथावत रखने का आदेश दिया। इसके बाद भी उसका वेतन नियमित नहीं किया गया। हाईकोर्ट में अवमानना दायर की तो तत्कालीन डीआईओएस ने माफी मांगकर वेतन का लाभ देने का भरोसा दिलाया। इसके बाद भी उसकी सेवा पुस्तिका आदि दुरुस्त नहीं की गई।
न्यायालय के आदेश पर शहर कोतवाली में तत्कालीन प्रधानाचार्य और लिपिक के विरुद्ध धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज हुई, लेकिन तत्कालीन बसपा सरकार के मंत्री से मिलकर सरकार से मुकदमा वापस करवा दिया। रिटायर्ड लिपिक ने कहा कि वह पिछले वर्ष से शिकायत कर रहा, लेकिन उसकी पेंशन और वेतनमान आदि नहीं दिया गया।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने धारा 154 सीआरपीसी के तहत दी गई इस अर्जी पर कोतवाली प्रभारी को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। शहर कोतवाली में डीआईओएस कार्यालय के तत्कालीन वरिष्ठ लिपिक केशपाल यादव, तत्कालीन प्रधानाचार्य बाबूलाल गुप्त, डीआईओएस हिफजुर्रहमान, पूर्व डीआईओएस इब्राहिम और डीआईओएस कार्यालय के लिपिक सौरभ श्रीवास्तव के विरुद्ध धारा 218, 419, 420, 466, 467, 468, 166 की एफआईआर दर्ज की गई है। इसकी विवेचना कोतवाली के सब इंसपेक्टर अजय कुमार सिंह को सौंपी गई है।